निकाय चुनाव में भागदौड़ के बाद प्रत्याशियों की मौज, होटल-रिसॉर्ट में शुरू हुआ डेरा

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जयपुर राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों का मतदान संपन्न होने के साथ ही राजनीतिक दलों की रणनीतिक गतिविधियां होटल और रिसॉर्ट्स की तरफ शिफ्ट होने लगी हैं। छह नगर निगमों समेत 147 निकायों के लिए हो रहे चुनाव में 11 सितंबर को दूसरे चरण का मतदान पूरा हो गया है, जिसमें 18,266 प्रत्याशी मैदान में हैं और 87 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं।

बाड़ाबंदी और संख्या बल की राजनीति

  • नतीजों से पहले घेराबंदी: भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दल अपने-अपने पार्षदों और संभावित जिताऊ निर्दलीयों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। पहले चरण के बाद अब दूसरे चरण के प्रत्याशियों को भी सुरक्षित ठिकानों पर रखने की सुगबुगाहट तेज हो गई है।

  • रिसॉर्ट की राजनीति: जिन प्रत्याशियों ने चुनाव के दौरान गली-मोहल्लों में धूल फांकी है, वे अब होटल और रिसॉर्ट की चारदीवारी के भीतर नजर आ सकते हैं। हालांकि, इस खातिरदारी और आराम के पीछे दलों की मुख्य चिंता अपने पार्षदों का पाला बदलने से रोकने और संख्या बल को एकजुट रखने की है।

  • निर्दलीय पार्षदों का महत्व: जहां स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा, वहां निर्दलीय पार्षद निर्णायक भूमिका निभाएंगे। ऐसे में उन्हें अपने पाले में लाने के लिए पर्दे के पीछे जोड़-तोड़ का दौर शुरू हो गया है।

बड़े शहरों और निगमों पर खास फोकस

जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर, उदयपुर और अजमेर जैसे बड़े नगर निगमों (जैसे 150 वार्डों वाले जयपुर नगर निगम) में मुकाबला बेहद रोमांचक माना जा रहा है। यहां सिर्फ चुनाव जीतने तक बात सीमित नहीं है, बल्कि परिणाम के बाद बोर्ड बनाने के लिए आवश्यक जादुई आंकड़े को सुरक्षित रखना पार्टियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

14 सितंबर को खुलेंगी ईवीएम

14 सितंबर को होने वाली मतगणना के बाद तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी कि किस दल को बहुमत मिला और कहां निर्दलीयों की असली पूछपरख है। इसके बाद निकाय प्रमुख की कुर्सी के लिए राजनीतिक सक्रियता और तेज होगी, जहां फोन घनघनाने से लेकर सियासी समीकरण साधने तक का दौर देखने को मिलेगा।