वाराणसी| भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) गाजीपुर से वाराणसी के मध्य 133 किलोमीटर लंबा जल हाईवे निर्मित करने जा रहा है। लगभग 102.98 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण होने वाली इस परियोजना के अंतर्गत गंगा नदी की तलहटी से गाद और कठोर परतों को हटाकर एक विशेष नेविगेशन चैनल तैयार किया जाएगा। राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (NW-1) और जलमार्ग विकास परियोजना के तहत गाजीपुर-वाराणसी खंड में न्यूनतम 2.20 मीटर की जल गहराई (LAD) बनाए रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे जलस्तर घटने या बढ़ने पर भी 1500 से 2000 डेडवेट टन (DWT) क्षमता वाले विशाल मालवाहक जहाजों का आवागमन बाधित न हो।
परियोजना से होने वाले प्रमुख लाभ
कार्गो परिवहन में सुगमता: वाराणसी स्थित मल्टीमॉडल टर्मिनल तक भारी और थोक माल पहुंचाने में सुगमता होगी।
सस्ते परिवहन का विकल्प: सड़क मार्ग की तुलना में जल परिवहन से लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी आएगी।
व्यापार को बढ़ावा: पूर्वांचल के कृषि उत्पादों, खाद्यान्न और औद्योगिक निर्माण सामग्री को देश के बड़े बाजारों तक निर्बाध रूप से पहुंचाया जा सकेगा।
सड़कों पर घटेगा दबाव: भारी ट्रकों की निर्भरता कम होने से यातायात का दबाव घटेगा।
रामनगर में शुरू हुआ देश का पहला 'शिप रिपेयर फैसिलिटी सेंटर'
वाराणसी के रामनगर (राल्हूपुर) स्थित बंदरगाह के समीप गंगा तट पर देश के प्रथम शिप रिपेयर फैसिलिटी सेंटर का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है। लार्सन एंड टूब्रो (L&T) द्वारा 321.39 करोड़ रुपये की लागत से 4 एकड़ भूमि पर तैयार किए जा रहे इस केंद्र में 60 मीटर लंबे और 600 टन क्षमता तक के जहाजों की मरम्मत (ड्राई डॉक) की जा सकेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शिलान्यास की गई इस परियोजना से जहाजों की मरम्मत हेतु तटीय क्षेत्रों पर निर्भरता समाप्त होगी, जिससे समय व व्यय की बचत के साथ स्थानीय रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।









