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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में कभी एक-दूसरे की कट्टर विरोधी रहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) और वामदलों के तेवर अब बदलते नजर आ रहे हैं। राज्य की सत्ता से बेदखल होने के बाद उपजे राजनीतिक हालातों और चुनाव आयोग से जुड़े घटनाक्रम के बीच अब दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद शुरू हो गया है।

ममता बनर्जी और एम बेबी के बीच फोन पर हुई चर्चा

हाल ही में चुनाव आयोग को लेकर सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के बाद टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के महासचिव एम बेबी के बीच फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई है। खास बात यह है कि टीएमसी और सीपीएम दोनों ही विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक के संस्थापक सदस्य हैं, लेकिन अब तक बंगाल के राजनीतिक समीकरणों के चलते दोनों के बीच कोई सीधा औपचारिक संपर्क नहीं था। दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग, चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र की विश्वसनीयता को बचाने के लिए संयुक्त रूप से अभियान चलाने की संभावनाओं पर चर्चा की।

'इंडिया' गठबंधन की बैठक बुलाने की जोरदार अपील

माकपा महासचिव एम बेबी ने इससे पहले विपक्षी दलों के नेताओं को पत्र लिखकर चुनाव आयोग के हालिया घटनाक्रम पर चर्चा के लिए तत्काल बैठक बुलाने की मांग की थी। इस पत्र का जवाब देते हुए ममता बनर्जी ने सहमति जताई और देश में एक असाधारण स्थिति पैदा होने की बात कही। इसके साथ ही ममता ने कांग्रेस नेता व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी फोन पर चर्चा कर अगले दो से तीन दिनों के भीतर 'इंडिया' गठबंधन की एक अहम बैठक बुलाने की अपील की है।

क्या थे माकपा महासचिव के पत्र के मुख्य बिंदु?

माकपा महासचिव एम बेबी ने अपने पत्र में चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने लिखा था कि आयोग के कामकाज को लेकर उठाई गई आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए 'एसआईआर' (SIR) प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे करोड़ों मतदाताओं के मताधिकार पर संकट मंडरा रहा है। उन्होंने जोर दिया कि लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और मताधिकार की रक्षा के लिए सभी विपक्षी दलों को आपसी सहमति से तारीख और स्थान तय कर जल्द रणनीति बनानी चाहिए।

विपक्ष की प्रमुख मांगें और टीएमसी के लिए चुनौतियां

विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चुनाव आयोग के कामकाज की निष्पक्ष जांच कराने और विवादास्पद प्रक्रिया को रोकने की मांग उठाई है। इस बीच, पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के लिए समय काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। हालिया विधानसभा चुनावों में करारी शिकस्त के बाद पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और असहज स्थितियां देखने को मिल रही हैं, जिससे दल की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।