महासमुंद (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले की पुलिस ने मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी से जुड़े एक बड़े संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इस कार्रवाई के तहत गिरोह से जुड़े दस विभिन्न ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की, जिसमें लगभग 1,48,54,750 रुपये की भारी-भरकम नकदी और एक नोट गिनने की मशीन बरामद की गई है।
मास्टरमाइंड समेत पांच आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस पूरे आपराधिक नेटवर्क का खुलासा करते हुए गिरोह के कथित मास्टरमाइंड मुकेश चंद्राकर सहित उसके चार अन्य सहयोगियों को धर दबोचा है। घटनास्थल और ठिकानों से मजदूरों के पलायन से संबंधित कई रजिस्टर, डायरियां, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और अन्य महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज जब्त किए गए हैं। पुलिस जांच के अनुसार, इस गिरोह के तार छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त पड़ोसी राज्य ओडिशा तथा देश के अन्य कई राज्यों से जुड़े हुए हैं।
एक अस्पताल के मेमो से हुआ मामले का खुलासा
इस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश होने की शुरुआत एक सरकारी अस्पताल से प्राप्त मेमो के माध्यम से हुई। गत 21 सितंबर को स्थानीय पुलिस को अस्पताल से एक मेमो प्राप्त हुआ था, जिसमें एक नाबालिग बालिका के शारीरिक शोषण और उसके गर्भवती होने की गंभीर जानकारी दी गई थी। इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अपनी जांच शुरू की। शुरुआती तफ्तीश के दौरान पुलिस को क्षेत्र में मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी और मजदूरों के अवैध रूप से संगठित पलायन से जुड़े एक बड़े गिरोह के सक्रिय होने के सुराग मिले, जिसके बाद पुलिस ने संदिग्ध ठिकानों और आरोपियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी।
दस ठिकानों पर एक साथ पुलिस की छापेमारी
पर्याप्त और पुख्ता साक्ष्य हाथ लगने के बाद पुलिस ने एक साथ दस संदिग्ध ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से 1,48,54,750 रुपये की भारी नकद राशि बरामद की, जिसे गिनने के लिए मौके पर ही नोट गिनने की मशीन मंगवानी पड़ी। पुलिस ने मुख्य आरोपी मुकेश चंद्राकर के साथ-साथ लता सवर, नंदू मोहंती, पीयूष अग्रवाल और मनीष गुप्ता को गिरफ्तार किया है। मौके से मजदूरों के पलायन से जुड़े रिकॉर्ड, डायरियां, मोबाइल फोन, पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और बंधक बनाए जाने से संबंधित कई दस्तावेज हाथ लगे हैं।
एडवांस रकम का प्रलोभन देकर मजदूरों को फंसाना
पुलिस की प्रारंभिक जांच में इस गिरोह के तौर-तरीकों को लेकर कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। यह गिरोह मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और अत्यंत गरीब परिवारों के मजदूरों को अपना आसान शिकार बनाता था। आरोपी भोले-भाले मजदूरों को पैसों का एडवांस लालच देकर अपने जाल में उलझा लेते थे और फिर उन्हें छत्तीसगढ़ से दूसरे राज्यों के ईंट भट्ठों तथा अन्य जोखिम भरे काम-धंधों के लिए भेज देते थे। पुलिस के अनुसार, उन जगहों पर मजदूरों को अत्यंत कठिन और अमानवीय परिस्थितियों में काम करने के लिए विवश किया जाता था तथा भय, दबाव एवं धमकियों के बल पर उनकी आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध रखा जाता था।
संगठित अपराध की गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज
खल्लारी थाने की पुलिस ने सभी गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं तथा संगठित अपराध से जुड़ी धारा 111 के तहत गंभीर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब मानव तस्करी के साथ-साथ बाल मजदूरी, नाबालिगों की तस्करी तथा महिलाओं एवं बालिकाओं के शोषण से जुड़े तमाम पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है। इसके साथ ही, जब्त किए गए मोबाइल फोन, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन के दस्तावेजों की फोरेंसिक व तकनीकी जांच की जा रही है, ताकि इस गिरोह के आर्थिक साम्राज्य और इसमें संलिप्त अन्य संदिग्ध चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।









