तेहरान। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका और इजराइल पर मुस्लिम देशों को आपस में बांटने और उनके प्राकृतिक संसाधनों पर अवैध कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि ईरान को अब अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत या समझौते पर कोई भरोसा नहीं बचा है, क्योंकि पूर्व में हुए समझौतों के बावजूद ईरान पर लगातार हमले किए गए और कड़े प्रतिबंध थोपे गए। पेजेश्कियान ने सवाल उठाया कि आखिर किस आधार पर अमेरिका के साथ कोई नया समझौता संभव माना जा सकता है।
संयुक्त राष्ट्र में रखा गया था युद्ध समाप्त करने का प्रस्ताव
राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने खुलासा किया कि हाल ही में वह और विदेश मंत्री अब्बास अरागची संयुक्त राष्ट्र की बैठक में मध्य पूर्व में युद्ध समाप्त करने के लिए एक शांति प्रस्ताव लेकर अमेरिका गए थे। ईरान के इस प्रस्ताव की रूपरेखा कुछ इस प्रकार थी:
शुरुआती 5 दिन: पहले चार से पांच दिनों के भीतर प्रारंभिक समझौते की पूरी प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाना।
छठा दिन: सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को दोबारा पूरी तरह से खोलना।
सातवां दिन: अमेरिका के साथ अंतिम शांति समझौते पर औपचारिक बातचीत शुरू करना।
ईरान की शर्तें: इस शांति प्रक्रिया के बदले में ईरान ने मांग की थी कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों से अपनी नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह हटाए, तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में राहत दे, लगभग 12 अरब डॉलर की विदेशी संपत्तियों (फ्रीज फंड) को जारी करे और पूरे क्षेत्र में तत्काल प्रभाव से पूर्ण युद्धविराम लागू हो।
प्रतिबंधों और मानवीय संकट पर तीखी प्रतिक्रिया
ईरानी राष्ट्रपति ने देश पर थोपे गए दंडात्मक आर्थिक प्रतिबंधों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि जिन पश्चिमी देशों ने ईरान को जीवनरक्षक दवाइयों और आवश्यक कच्चे माल तक की पहुंच से वंचित कर दिया, वही देश आज गाजा में भुखमरी, भोजन और पानी की भीषण किल्लत के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के अमानवीय प्रतिबंधों के जरिए ईरान को झुकाने या उस पर दबाव बनाने के तमाम प्रयास पूरी तरह विफल साबित होंगे। साथ ही, उन्होंने मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय देशों को आपसी सहयोग बढ़ाने की वकालत करते हुए कहा कि इस क्षेत्र को किसी भी बाहरी 'पुलिसवाले' की आवश्यकता नहीं है।
सऊदी अरब से अपील और अमेरिका-इजराइल पर निशाना
पेजेश्कियान ने अमेरिका को इस मौजूदा संघर्ष का मुख्य हमलावर करार देते हुए याद दिलाया कि ईरान ने आधुनिक इतिहास में लंबे समय से किसी भी दूसरे देश पर पहले आक्रमण नहीं किया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और इजराइल को यह गलतफहमी थी कि कुछ ही दिनों में ईरानी सरकार अंदरूनी दबाव से कमजोर हो जाएगी, लेकिन उनका यह आकलन गलत साबित हुआ। ईरान हर हमले का डटकर मुकाबला कर रहा है और आगे भी पीछे नहीं हटेगा।
क्षेत्रीय कूटनीति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सऊदी अरब मुस्लिम दुनिया को एकजुट करने में एक अहम और सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित यमनी बलों से आपसी बातचीत के जरिए सभी मतभेद सुलझाने का आह्वान किया और यह भी स्पष्ट किया कि हूतियों की सैन्य गतिविधियां सीधे तौर पर ईरान से संचालित नहीं होती हैं।
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