MRI मशीन में खराबी से मेरठ मेडिकल कॉलेज में जांच ठप, एक महीने तक असर की आशंका

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मेरठ| लाला लाजपत राय स्मारक मेडिकल कॉलेज में एमआरआई (Magnetic Resonance Imaging) जाँच की सुविधा फिलहाल अनिश्चितकाल के लिए ठप हो गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस मशीन के पाइप में पिछले कुछ दिनों से लगातार लीकेज की समस्या बनी हुई थी, जिसके कारण पहले से ही जाँच कार्य प्रभावित हो रहा था। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को अचानक मशीन का पाइप फट गया, जिससे उसमें मौजूद संपूर्ण हीलियम गैस लीक हो गई। इस गंभीर तकनीकी खराबी के चलते अब मेडिकल कॉलेज में कम से कम एक महीने तक एमआरआई जाँच की सुविधा पूरी तरह प्रभावित रहने की आशंका जताई जा रही है। उल्लेखनीय है कि इस मेडिकल कॉलेज में रोजाना औसतन 15 से 20 गंभीर मरीज एमआरआई जाँच के लिए आते हैं। इस सेवा के बंद होने से मेरठ के अलावा आसपास के तमाम जनपदों से आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

दस वर्ष पुरानी है एमआरआई मशीन और हीलियम गैस का महत्व

अस्पताल प्रशासन से प्राप्त विवरण के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में स्थापित यह एमआरआई मशीन लगभग 10 वर्ष पुरानी है। मशीन के भीतर लगे सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट को सुरक्षित और नियंत्रित तापमान पर बनाए रखने के लिए उसे लगातार ठंडा रखना बेहद आवश्यक होता है। इस प्रक्रिया के लिए अत्यंत ठंडी तरल हीलियम गैस का उपयोग किया जाता है। पिछले कुछ दिनों से मशीन के पाइप में हल्की लीकेज की शिकायत मिल रही थी, लेकिन बृहस्पतिवार को पाइप के पूरी तरह फटने के कारण सारी हीलियम गैस तेजी से बाहर निकल गई और मशीन ने काम करना बंद कर दिया। इसके बाद से ही एमआरआई जाँच की यह सुविधा पूरी तरह से ठप पड़ी हुई है।

गरीब और गंभीर रोगियों पर पड़ेगा सबसे बड़ा असर

मेडिकल कॉलेज में मेरठ और उसके समीपवर्ती जिलों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में जरूरतमंद, गरीब और गंभीर रूप से बीमार मरीज इलाज के लिए पहुँचते हैं। एमआरआई सेवा के अचानक बंद हो जाने के कारण अब इन मरीजों को आवश्यक जाँच करवाने के लिए या तो अन्य वैकल्पिक सरकारी अस्पतालों का रुख करना होगा या फिर भारी आर्थिक कठिनाइयों के बीच निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों पर मँहगे दामों में जाँच करानी पड़ेगी। निजी केंद्रों पर एमआरआई कराने से आम और गरीब मरीजों की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। हालांकि, अस्पताल प्रशासन का दावा है कि इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा को यथाशीघ्र सुचारू करने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

मरम्मत और हीलियम गैस की आपूर्ति में लगेगा लगभग एक माह का समय

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर.सी. गुप्ता ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि मशीन को दोबारा सुचारू रूप से चालू करने के लिए विशेष रूप से हीलियम गैस की नई खेप की व्यवस्था करनी होगी। इसके अतिरिक्त, मशीन के आंतरिक हिस्सों की तकनीकी मरम्मत और उसे पूरी तरह से सुरक्षित तरीके से रीस्टार्ट करने की लंबी प्रक्रिया को पूरा करना होगा। इन सभी तकनीकी कार्यों में कम से कम एक महीने का समय लगने की संभावना है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा संबंधित मेंटेनेंस (रखरखाव) कंपनी को औपचारिक पत्र भेजकर हीलियम गैस की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा तत्काल प्रभाव से मरम्मत कार्य शुरू करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।