जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण फैसले में टिप्पणी की है कि मां और शिशु के बीच के पवित्र बंधन की रक्षा की जानी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सरकारी सेवा में कार्यरत एक वर्ष से छोटे बच्चे की मां का 'मशीनी अंदाज' (यांत्रिक तरीके से) में तबादला कर इस रिश्ते को खंडित नहीं किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट का मुख्य आदेश और अंतरिम राहत
तबादला आदेश पर रोक: अदालत ने दो महीने के छोटे बच्चे की मां के मामले में हस्तक्षेप करते हुए उनके तबादला आदेश पर छह सप्ताह के लिए अंतरिम रोक लगा दी है।
नए सिरे से विचार के निर्देश: न्यायाधीश अनूप कुमार ढंड ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में याचिकाकर्ता के प्रार्थना पत्र पर पांच सप्ताह के भीतर नए सिरे से उचित निर्णय ले।
नई पॉलिसी बनाने की हिदायत: कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी सलाह दी है कि ऐसी महिला कर्मचारियों (जिनके छोटे बच्चे हैं) के लिए मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उचित तबादला नीति या स्पष्ट नियम बनाए जाने चाहिए, ताकि मां और शिशु को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा प्रकरण सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर सिटी में वरिष्ठ अध्यापक के पद पर कार्यरत सुमन मीणा की याचिका से जुड़ा है।
याचिकाकर्ता ने इस वर्ष 13 मई को बच्चे को जन्म दिया था। इसके कुछ ही हफ्तों बाद 7 जुलाई को उनका तबादला करौली जिले में कर दिया गया।
अदालत को बताया गया कि इससे पहले उनके एक अन्य बच्चे का बाल्यकाल में निधन हो चुका है, और वर्तमान में दो माह के इस छोटे बच्चे की पूरी देखभाल की जिम्मेदारी उन्हीं पर है।
प्रशासनिक स्तर और राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण से राहत न मिलने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहाँ अदालत ने मानवीय आधार पर यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है।









