बिलासपुर| बिलासपुर-एर्नाकुलम एक्सप्रेस ट्रेन के लगातार विलंब से चलने की गंभीर समस्या से परेशान रेल यात्रियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। यात्रियों द्वारा केंद्रीयकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) पर लगातार शिकायतें दर्ज कराए जाने के बाद, अब रेलवे प्रशासन ने इस ट्रेन के समय पर संचालन के लिए एक स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ने इस ट्रेन का रैक बदलने के प्रस्ताव पर व्यवहार्यता (फ्यूसिबिलिटी) का परीक्षण शुरू कर दिया है।
देरी का मुख्य कारण: आरा-बिलासपुर एक्सप्रेस से जुड़ा रैक
बिलासपुर रेल मंडल के वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक कार्यालय की ओर से जारी एक आधिकारिक पत्र में ट्रेन संख्या 22815 बिलासपुर-एर्नाकुलम एक्सप्रेस के लगातार लेट होने के मुख्य कारणों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, इस ट्रेन में उपयोग होने वाला रैक मूल रूप से ट्रेन संख्या 22844 आरा-बिलासपुर एक्सप्रेस के रूप में बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर पहुँचता है। चूंकि आरा-बिलासपुर एक्सप्रेस के आगमन में ही अक्सर विलंब हो जाता है, इसलिए उसी रैक को तैयार कर बिलासपुर-एर्नाकुलम एक्सप्रेस के रूप में आगे के लिए रवाना किया जाता है। यही कारण है कि रैक के देर से पहुँचने का सीधा और नकारात्मक असर एर्नाकुलम एक्सप्रेस के निर्धारित प्रस्थान समय पर पड़ता है।
लंबी दूरी और कई रेल मंडलों से जुड़ा जटिल मामला
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, बिलासपुर-एर्नाकुलम एक्सप्रेस एक लंबी दूरी की सुपरफास्ट ट्रेन है जो देश के कई अलग-अलग जोन और रेल मंडलों से होकर अपने गंतव्य तक पहुँचती है। इस वजह से इसके परिचालन में होने वाली देरी का तकनीकी समाधान केवल बिलासपुर मंडल के स्थानीय स्तर पर करना आसान नहीं था। हालांकि, यात्रियों की लगातार मिल रही शिकायतों और उनके बहुमूल्य सुझावों को पूरी गंभीरता से लेते हुए, रेलवे प्रशासन ने अब इस ट्रेन का रैक बदलने के व्यावहारिक विकल्प पर तेजी से काम करना शुरू कर दिया है।
कोचिंग कंट्रोलर को दी गई सूचना, जल्द मिलेगी राहत
रैक परिवर्तन से संबंधित इस नए प्रस्ताव की व्यवहार्यता का बारीकी से परीक्षण कराया जा रहा है। इस तकनीकी प्रक्रिया के संबंध में संबंधित क्षेत्र के कोचिंग कंट्रोलर को भी आवश्यक सूचना दे दी गई है, ताकि ट्रेन के दैनिक परिचालन तंत्र में जरूरी बदलाव किए जा सकें। रेलवे प्रशासन को पूरी उम्मीद है कि इस ट्रेन को एक नया और स्वतंत्र रैक मिलने से इसके समय पर रवाना होने में उल्लेखनीय सुधार आएगा, जिससे यात्रियों को पिछले लंबे समय से चली आ रही ट्रेन की लेट-लतीफी की समस्या से आखिरकार बड़ी राहत मिल सकेगी।









