भुवनेश्वर कुमार की टीम में वापसी के पीछे क्या है कहानी? अगरकर के कार्यकाल के बाद बदले समीकरण

0
7

भारतीय क्रिकेट में एक बार फिर अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार के नाम की चारों तरफ चर्चा जोरों पर है। करीब चार साल तक राष्ट्रीय टीम से लगातार बाहर रहने के बाद, 36 वर्षीय इस दिग्गज तेज गेंदबाज की भारतीय टी20 टीम में धमाकेदार वापसी हो गई है। उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ इसी महीने खेली जाने वाली पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज के लिए आधिकारिक 16 सदस्यीय टीम में शामिल किया गया है। भुवनेश्वर की यह बहुप्रतीक्षित वापसी ऐसे समय में हुई है, जब अजीत अगरकर चयन समिति के प्रमुख पद से हट चुके हैं और पूर्व स्पिनर प्रज्ञान ओझा अंतरिम मुख्य चयनकर्ता की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि अगरकर के कार्यकाल के दौरान भविष्य की युवा पीढ़ी की ओर देखने की रणनीति के चलते भुवनेश्वर के लिए टीम में वापसी का मार्ग काफी कठिन था।

आईपीएल में किए गए शानदार और दमदार प्रदर्शन ने दिलाई राष्ट्रीय टीम में वापसी

भुवनेश्वर कुमार ने वर्ष 2025 और 2026 के आईपीएल सत्र के दौरान रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) की तरफ से खेलते हुए बेहद शानदार और उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था। इन दो सत्रों के सफर में उन्होंने कुल 45 विकेट अपने नाम किए और टीम को लगातार दो बार आईपीएल का चैंपियन बनाने में अपनी सबसे अहम भूमिका निभाई। वर्ष 2025 में उन्होंने कुल 17 विकेट हासिल किए थे, जबकि वर्ष 2026 के आईपीएल सत्र में उनके खाते में कुल 28 विकेट दर्ज हुए। नई गेंद से गेंद को स्विंग और सीम कराने की उनकी पुरानी और अचूक कला ने एक बार फिर उन्हें क्रिकेट जगत के केंद्र में ला दिया है। पावरप्ले के शुरुआती ओवरों में उनकी कसी हुई गेंदबाजी ने दुनिया के कई शीर्ष बल्लेबाजों को खुलकर खेलने से रोका और परेशान किया।

जिस स्विंग ने कभी साथ छोड़ा था, वही आज बनी उनकी वापसी की सबसे बड़ी वजह

वर्ष 2022 में जब भुवनेश्वर कुमार को भारतीय टीम से बाहर किया गया था, तो उसके पीछे उनकी गेंदबाजी की गति (पेस) में आई गिरावट और गेंद को पहले की तरह प्रभावी ढंग से स्विंग कराने में आ रही असमर्थता को मुख्य वजह माना गया था। उस दौर में टी20 क्रिकेट के फॉर्मेट में युवा और तेज गति वाले गेंदबाजों का दबदबा तेजी से बढ़ रहा था। लेकिन भुवनेश्वर ने कभी भी हार नहीं मानी। उन्होंने बिना किसी तरह के सार्वजनिक बयानबाजी या विवाद में पड़े चुपचाप अपनी गेंदबाजी पर कड़ी मेहनत जारी रखी। वह उत्तर प्रदेश के लिए सफेद गेंद के घरेलू क्रिकेट में लगातार खेलते रहे और टीम के युवा तेज गेंदबाजों के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका भी निभाई। इसके बाद आईपीएल के मंच पर उनके बेहतरीन प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनकी सबसे बड़ी ताकत आज भी हवा में गेंद को स्विंग कराने और पिच से सीम मूवमेंट हासिल करने की उनकी अद्भुत कला है।

क्रिकेट नगरी मेरठ की हवा और परंपरा में बसा है स्विंग का यह बेजोड़ हुनर

भुवनेश्वर कुमार मूल रूप से मेरठ से ताल्लुक रखते हैं, जिसे भारतीय क्रिकेट में पारंपरिक रूप से स्विंग गेंदबाजी के गढ़ और क्रिकेट की गेंदें बनाने के लिए देश भर में जाना जाता है। उनसे पहले मेरठ के ही एक अन्य शानदार तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार ने भी भारतीय क्रिकेट में अपनी घातक स्विंग गेंदबाजी से एक खास और बड़ी पहचान बनाई थी। भुवनेश्वर की पहचान हमेशा से उनकी सटीक आउटस्विंगर और अचानक बल्लेबाजों की तरफ अंदर आने वाली खतरनाक गेंदों के लिए रही है। उनकी गेंदबाजी में गति से ज्यादा नियंत्रण, सटीकता और स्विंग सबसे अहम रहे हैं। उनका यही लंबा अंतरराष्ट्रीय अनुभव अब न्यूजीलैंड के आगामी दौरे पर टीम इंडिया के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।

जसप्रीत बुमराह की गैरमौजूदगी में युवा गेंदबाजों के लिए मार्गदर्शक बनेंगे भुवी

भुवनेश्वर कुमार की इस वापसी को प्रमुख तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति के संदर्भ में भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस अनुभवी तेज गेंदबाज के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का लंबा और समृद्ध अनुभव है, जिसके सहारे वे मैदान पर युवा गेंदबाजों का मार्गदर्शन भी कर सकते हैं। वर्तमान टीम में शामिल युवा खिलाड़ियों जैसे मयंक यादव और प्रिंस यादव को भविष्य के विकल्पों के रूप में देखा जा रहा है, ऐसे में भुवनेश्वर कुमार का यह तजुर्बा इन सभी युवा गेंदबाजों के लिए बहुत काम आएगा।

भुवनेश्वर कुमार का अब तक का शानदार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट रिकॉर्ड

भुवनेश्वर कुमार ने भारत के लिए अपने शानदार करियर में अब तक कुल 21 टेस्ट मैच, 121 एकदिवसीय (वनडे) मैच और 87 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। अकेले टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट फॉर्मेट में उनके नाम कुल 90 विकेट दर्ज हैं। सफेद गेंद के क्रिकेट में पावरप्ले के दौरान नई गेंद से स्विंग कराने की उनकी काबिलियत लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट टीम की सबसे बड़ी ताकत रही है।

स्पिनर वरुण चक्रवर्ती की भी हुई भारतीय टीम में वापसी

न्यूजीलैंड के खिलाफ घोषित इस टी20 सीरीज के लिए चुनी गई टीम में प्रतिभाशाली स्पिन गेंदबाज वरुण चक्रवर्ती की भी भारतीय टीम में वापसी हुई है। एशियाई खेलों से ठीक पहले लगी चोट के कारण वह काफी समय से टीम से बाहर चल रहे थे, लेकिन अब पूरी तरह से फिट होकर उन्होंने एक बार फिर राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है।

22 अक्टूबर से शुरू होगी भारत और न्यूजीलैंड के बीच रोमांचक टी20 सीरीज

भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेली जाने वाली पांच मैचों की यह टी20 श्रृंखला आगामी 22 अक्टूबर से 1 नवंबर तक आयोजित की जाएगी। इस सीरीज का पहला और दूसरा मुकाबला क्राइस्टचर्च के मैदान पर खेला जाएगा, जबकि तीसरा मैच वेलिंगटन में, चौथा मुकाबला ऑकलैंड में और पांचवां तथा अंतिम मुकाबला हैमिल्टन में खेला जाएगा। इस टी20 सीरीज के संपन्न होने के बाद भारतीय टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की वनडे सीरीज और दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला भी खेलेगी।

भुवी की वापसी ने तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की उम्मीदों को भी दिया नया बढ़ावा

भुवनेश्वर कुमार की इस प्रेरणादायक वापसी ने भारतीय क्रिकेट गलियारों में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अब अन्य अनुभवी और सीनियर तेज गेंदबाजों के लिए भी राष्ट्रीय टीम के दरवाजे दोबारा खुल सकते हैं? उनके इस शानदार कमबैक के बाद एक पूर्व भारतीय खिलाड़ी और बीसीसीआई से जुड़े एक अधिकारी ने मजाकिया लहजे में यह तक कह दिया कि, 'अगर भुवनेश्वर कुमार की वापसी हो सकती है, तो फिर मोहम्मद शमी की क्यों नहीं?' कुल मिलाकर, चार साल के लंबे और कठिन इंतजार के बाद भुवनेश्वर की यह वापसी केवल एक खिलाड़ी का कमबैक मात्र नहीं है, बल्कि यह उस समर्पित गेंदबाज की वापसी है जिसने सबसे बुरे दौर में भी बिना किसी शोर-शराबे के अपनी कला पर भरोसा रखा और आईपीएल में अपने खेल के दम पर आलोचकों और चयनकर्ताओं को करारा जवाब दिया। अब न्यूजीलैंड की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में एक बार फिर से उनकी घातक स्विंग गेंदबाजी पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी होंगी।