CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर सौरभ भारद्वाज का दावा, तारीख भी बताई

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नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। ‘इंडिया’ गठबंधन की ओर से मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता की कमी को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

AAP का बड़ा दावा: 10 अक्टूबर से पहले दे सकते हैं इस्तीफा

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने लिखा है कि उनके सूत्रों के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार 10 अक्टूबर से पहले अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) से जुड़े खुलासों के बाद से विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।

निर्वाचन सदन की ओर विपक्ष का मार्च और सुरक्षा के कड़े पहरे

चुनावी मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं के विरोध में विपक्षी सांसदों और नेताओं ने चुनाव आयोग के मुख्यालय (निर्वाचन सदन) की ओर मार्च निकाला। इस प्रदर्शन को देखते हुए मध्य दिल्ली में सुरक्षा के भारी-भरकम इंतजाम किए गए हैं। आयोग के कार्यालय की ओर जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग की गई है।

समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि विपक्षी नेता हर हाल में निर्वाचन सदन तक पहुंचेंगे। उन्होंने भाजपा द्वारा विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में किए गए बदलावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पैनल से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटाकर एक केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया है। उन्होंने संसद से विपक्षी सांसदों के निलंबन का मुद्दा उठाकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की।

विपक्ष ने आपातकाल जैसी स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान मसूद ने दिल्ली में भारी पुलिस बल की तैनाती पर निशाना साधते हुए इसकी तुलना आपातकाल जैसी स्थिति से की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त को खुद ही अपने पद छोड़ने पर विचार करना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा रोके जाने और बैरिकेडिंग के सवाल पर विपक्षी नेताओं ने कहा कि वे लोकतंत्र, मतदाता सूची और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें किसी भी परिस्थिति का सामना क्यों न करना पड़े।