विपक्ष के मार्च में महिला सांसदों से कथित दुर्व्यवहार, संजय राउत ने बताई पुलिस तैनाती

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नई दिल्ली। चुनाव आयोग के खिलाफ दिल्ली में विपक्षी सांसदों के मार्च को रोके जाने और पुलिस कार्रवाई के बाद सियासी पारा पूरी तरह से चढ़ गया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने जा रहे कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद गुट), सपा और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं को पुलिस ने रोक दिया, जिसके बाद जमकर हंगामा हुआ। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई बड़े नेताओं को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ मामले भी दर्ज किए गए हैं।

संसद मार्ग पर रोका गया विपक्षी मार्च

विपक्ष के तमाम सांसद संसद परिसर से चुनाव आयोग के कार्यालय की तरफ शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग के पास भारी बैरिकेडिंग करके उनके रास्ते को रोक दिया। इसके विरोध में सभी सांसद सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और चुनाव आयोग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करने लगे। विपक्षी दल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलकर चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कुछ गंभीर आपत्तियों पर अपना ज्ञापन सौंपना चाहते थे। इस प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई अन्य नेता आकाशवाणी भवन परिसर तक पहुंचे, जहां उनका धरना घंटों तक जारी रहा।

आतंकियों जैसा व्यवहार करने का आरोप

शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस प्रदर्शन को कुचलने के लिए की गई भारी-भरकम सुरक्षा व्यवस्था पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विपक्षी सांसद पूरी तरह निहत्थे थे और जनता द्वारा चुने गए सम्मानित प्रतिनिधि हैं, इसके बावजूद उनके साथ ऐसा अमानवीय बर्ताव किया गया मानो वे कोई आतंकवादी हों। राउत ने दावा किया कि विपक्षी गठबंधन के इस मार्च को रोकने के लिए दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और दिल्ली पुलिस के करीब 1.5 लाख सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था।

चुनाव आयोग और विपक्षी दावों में टकराव

संजय राउत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह वैचारिक और राजनीतिक लड़ाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग पौने तीन सौ सांसद चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलकर अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी गई।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि मंगलवार शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल के अधिकृत प्रतिनिधि की तरफ से मुलाकात का कोई लिखित या आधिकारिक अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ था। आयोग के मुताबिक, शाम करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस के जरिए यह सूचना मिली कि राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल ज्ञापन देना चाहता है। आयोग ने कहा कि करीब 240 सांसदों के साथ प्रस्तावित इस मुलाकात को संसद भवन एनेक्सी में करने का आग्रह किया गया था, जिसे स्थापित प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं माना गया।

आंदोलन थमने वाला नहीं है: राउत

संजय राउत ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का यह आंदोलन यहां रुकने वाला नहीं है। उद्धव गुट के वरिष्ठ नेता ने कहा कि इसकी चिंगारी पूरे देश में सुलग चुकी है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अब इस्तीफा देना ही होगा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। इसके अलावा, राउत ने मंगलवार रात की कार्रवाई के दौरान महिला सांसदों के साथ कथित दुर्व्यवहार किए जाने का गंभीर आरोप भी लगाया है। गौरतलब है कि विपक्षी दल विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची में गड़बड़ियों के मुद्दों को लेकर लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।