अमेरिका ने श्रीलंका को चेताया- ईरान की मदद से बचें, भारत के पड़ोस में तनाव

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कोलंबो। ईरान को लेकर श्रीलंका एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के चक्रव्यूह में फंसता नजर आ रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने श्रीलंका को सख्त चेतावनी दी है कि यदि उसने अपने तट के पास फंसे लगभग 20 ईरानी टैंकरों को किसी भी प्रकार की सप्लाई जारी रखी, तो उसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। यह संकट तब गहराया जब श्रीलंका हिंद महासागर में फंसे इन ईरानी जहाजों को भोजन, ईंधन और ताजा पानी जैसी बुनियादी मानवीय जरूरतें मुहैया करा रहा था।

अमेरिकी दूतावास की कड़ी चेतावनी

श्रीलंका के विदेश मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कोलंबो स्थित अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि मानवीय संकट की दलील के बावजूद ईरानी जहाजों को जरूरी सामान की आपूर्ति तुरंत रोकी जाए। अमेरिका की इस सख्त चेतावनी के बाद श्रीलंकाई प्रशासन के सामने कूटनीतिक और आर्थिक संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि वहां का राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र इस बात से चिंतित था कि ईरानी क्रू को मझधार में अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

श्रीलंका के सामने संप्रभुता और आर्थिक हितों का संकट

श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिथा हेराथ ने सरकार को उन निजी आपूर्तिकर्ताओं से अलग करने का प्रयास किया है जो कथित तौर पर इन जहाजों तक सामान पहुंचा रहे थे। 'संडे टाइम्स' से बातचीत करते हुए उन्होंने पुष्टि की कि श्रीलंका की समुद्री सीमा के बाहर कुल 47 विदेशी जहाज हैं, जिनमें से 15 ईरानी जहाज हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान की ओर से आवश्यक वस्तुओं की मांग जरूर की गई थी, लेकिन श्रीलंकाई सरकार ने आधिकारिक तौर पर कोई मदद नहीं दी है और न ही ऐसा कोई इरादा है।

अब कोलंबो के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वह पश्चिमी देशों के दबाव के आगे बिना झुके अपने मित्र देशों को मानवीय सहायता देने की स्वतंत्रता और अपने आर्थिक हितों के बीच संतुलन कैसे बनाए रखेगा।