फ्लाईदुबई कॉकपिट घटना ने खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोल, तीन देशों पर उठे सवाल

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रियाद/दुबई। फ्लाईदुबई की उड़ान में हुई वह भयावह घटना, जहां कॉकपिट में कप्तान के पीछे खड़े एक सह-पायलट ने आपातकालीन कुल्हाड़ी से हमला करने का प्रयास किया था, यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाते तो इसे आसानी से टाला जा सकता था। इस गंभीर सुरक्षा चूक ने ओमान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इजरायल की विमानन और सुरक्षा प्रणालियों की गहरी और बहु-स्तरीय कमजोरियों को उजागर कर दिया है।

ओमान में उठी चिंताएं और जानकारी साझा न करने की पहली चूक

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे मामले की जड़ें ओमान में जुड़ी हुई हैं, जहां पायलट हमाम अल-हम्मामी की गतिविधियों को लेकर पहली बार गंभीर चिंताएं सामने आई थीं। ओमान एयर द्वारा की गई जांच में यह पाया गया था कि वह कट्टरपंथी विचारधारा से अत्यधिक प्रभावित था। इसके परिणामस्वरूप, हम्मामी को तुरंत उड़ान ड्यूटी से हटाकर एक डी-रेडिकलाइजेशन प्रोग्राम से गुजारा गया और बाद में उसे डेस्क जॉब सौंप दी गई।

हालांकि, यहीं पर पहली और सबसे बड़ी रणनीतिक चूक हुई। ओमान ने हम्मामी को एक संभावित खतरे के रूप में पहचान तो लिया, लेकिन इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील जानकारी को व्यापक स्तर पर अन्य देशों या अन्य एयरलाइंस के साथ साझा नहीं किया गया।

फ्लाईदुबई की भर्ती प्रक्रिया और पृष्ठभूमि की अनदेखी

ओमान द्वारा जानकारी साझा न करने का सीधा फायदा हम्मामी को मिला। ओमान एयर की नौकरी छोड़ने के कुछ समय बाद ही फ्लाईदुबई ने उसे अपने यहां पायलट के रूप में नियुक्त कर लिया। जांच में यह बात सामने आई कि एयरलाइन ने उसकी पिछली नौकरी के बारे में ओमान एयर से कोई संपर्क नहीं किया और न ही उसके रिकॉर्ड में आई गंभीर चिंताओं की कोई जानकारी जुटाई।

फ्लाईदुबई ने केवल उसका सामान्य क्रिमिनल बैकग्राउंड चेक किया, जो इस स्तर के सुरक्षा मामलों के लिए पूरी तरह अपर्याप्त साबित हुआ। नौकरी मिलने के बाद, हम्मामी को दुबई से तेल अवीव जैसे बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मार्ग पर तैनात कर दिया गया, जिस पर वह पहले भी कई बार उड़ान भर चुका था। वर्तमान में यूएई के अधिकारी फ्लाईदुबई की इस लचर हायरिंग और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन प्रक्रिया की गहन जांच कर रहे हैं।

इजरायल के स्तर पर सुरक्षा चूक और डेटाबेस का उपयोग न होना

हम्मामी को रोकने का आखिरी और सबसे बड़ा मौका इजरायल के पास था। आमतौर पर ओमान जैसे देशों के पायलट, जिनके इजरायल के साथ सीधे राजनयिक संबंध नहीं हैं, उन्हें इजरायल में उड़ान भरने की अनुमति नहीं होती। ऐसे में केवल हम्मामी की राष्ट्रीयता ही उसे रोकने के लिए पर्याप्त आधार होनी चाहिए थी।

नियमों के तहत, विदेशी एयरलाइंस को इजरायल पहुंचने से पहले यात्रियों और चालक दल की पूरी सूची (मैनिफेस्ट) वहां के प्रशासन को जमा करनी होती है। फ्लाईदुबई ने भी फ्लाइट 1073 का मैनिफेस्ट इजरायल को सौंपा था, और यह डेटा देश के पैसेंजर डेटा सिस्टम में पहले से मौजूद था।

हालांकि, इजरायल के परिवहन मंत्रालय का कहना है कि उनके पास विदेशी एयरलाइंस के चालक दल के सदस्यों की व्यक्तिगत पृष्ठभूमि की गहराई से जांच करने का अधिकार या तकनीकी विशेषज्ञता नहीं थी, और उन्हें यह भी जानकारी नहीं थी कि वे इस डेटाबेस का उपयोग कर सकते हैं। मंत्रालय ने इसके बजाय फ्लाईदुबई पर ही यह भरोसा जताया था कि एयरलाइन ने अपने पायलटों की राष्ट्रीयता और पृष्ठभूमि की उचित जांच कर ली होगी। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 की एक वर्गीकृत रिपोर्ट में इजरायल आने वाली विदेशी उड़ानों की सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद इन कमियों के प्रति पहले ही आगाह किया गया था, लेकिन ऐन मौके पर उस उपलब्ध जानकारी का उपयोग नहीं किया जा सका।