कोलकाता: रेजीनगर में मतदान के दौरान पुलिस के साथ हुई तीखी झड़प के बाद अपनी गिरफ्तारी के एक दिन बाद, आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के प्रमुख और नाओदा विधानसभा सीट से विधायक हुमायूं कबीर बुधवार को मीडिया के सामने काफी भावुक नजर आए। उन्होंने आगामी चुनावी राजनीति से दूरी बनाए रखने के स्पष्ट संकेत दिए और साथ ही यह भी दावा किया कि मुर्शिदाबाद जिले की मुस्लिम बहुल रेजीनगर सीट पर आने वाले समय में भाजपा जीत हासिल करेगी।
"शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री रहते विधानसभा नहीं जाऊंगा"
एजेयूपी विधायक हुमायूं कबीर ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब तक शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद पर हैं, तब तक वे पश्चिम बंगाल विधानसभा के अंदर कदम नहीं रखेंगे और सदन के किसी भी सत्र में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा, "मैं मुर्शिदाबाद जिले की नाओदा विधानसभा सीट के सम्मानित मतदाताओं से इसके लिए माफी भी मांगूंगा। यदि आवश्यकता पड़ी, तो मैं अपने संपूर्ण राजनीतिक जीवन से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लूंगा।"
इसी वर्ष संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में कबीर ने मुर्शिदाबाद जिले की नाओदा और रेजीनगर, दोनों ही महत्वपूर्ण सीटों पर शानदार जीत हासिल की थी। हालांकि, बाद में उन्होंने नाओदा सीट अपने पास रखने का निर्णय लिया और रेजीनगर सीट से अपना इस्तीफा दे दिया था, जिसके चलते रेजीनगर सीट पर मंगलवार को उपचुनाव संपन्न हुआ।
मतदान के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया था
रेजीनगर उपचुनाव में मतदान के दौरान मंगलवार की सुबह हुमायूं कबीर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। उन पर एक मतदान केंद्र से दूसरे केंद्र पर बिना किसी आधिकारिक अनुमति के जाने, मतदाताओं को प्रभावित करने, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को धमकाने और एक पुलिस अधिकारी का कॉलर तक पकड़ने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।
इस उपचुनाव में उनके सुपुत्र गोलाम नबी आजाद आम जनता उन्नयन पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में उम्मीदवार हैं। कबीर को रेजीनगर थाने में करीब 12 घंटे तक हिरासत में रखा गया और बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। इस घटना के ठीक एक दिन बाद उन्होंने मीडिया के सामने आकर विधानसभा की कार्यवाही से पूरी तरह किनारा करने की घोषणा कर दी।
पुलिस हिरासत को लेकर खड़े किए तीखे सवाल और 88 नंबर सीट का जिक्र
पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए हुमायूं कबीर ने कहा, "क्या यह कोई लोकतांत्रिक व्यवस्था है, जहाँ कोई भी पुलिस उपनिरीक्षक किसी चुने हुए विधायक को जबरन उठाकर बिना किसी ठोस कारण के 12 घंटे तक थाने में हिरासत में रखे? मैं पिछले दो महीनों से रेजीनगर की जनता के साथ शुभेंदु अधिकारी के अधीन काम कर रही पुलिस द्वारा किए जा रहे अलोकतांत्रिक व्यवहार का कड़ा विरोध करता हूँ। अधिकारी जी मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ राज्य के पुलिस मंत्री भी हैं। हुमायूं कबीर उनके जैसे पुलिस मंत्री की दया और कृपा पर राजनीति नहीं करेगा।"
उन्होंने आगे कहा कि वह नाओदा विधानसभा क्षेत्र की जनता की सेवा का कार्य निरंतर जारी रखेंगे, लेकिन विधानसभा के भीतर बिल्कुल नहीं जाएंगे। कबीर ने यह भी स्पष्ट किया कि वह विधानसभा की अल्पसंख्यक मामलों की समिति, सदन की समिति, कार्य सलाहकार समिति, किसी भी सर्वदलीय बैठक या विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बुलाई जाने वाली किसी बैठक में भी हिस्सा नहीं लेंगे।
उन्होंने अंत में कहा, "सदन के अंदर मेरे लिए आरक्षित 88 नंबर की सीट अब पूरी तरह खाली पड़ी रहेगी। जब किसी राजनीतिक दल का प्रमुख व्यक्ति अपने ही पार्टी कार्यालय के भीतर सुरक्षित नहीं है, और पुलिस उन्हें वहां से घसीटकर ले जाती है, तो यही मुख्य कारण है कि मेरा मन इस सारे लोकतांत्रिक मज़ाक को स्वीकार करने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है।" कबीर ने कहा कि आने वाले दिनों में वह नाओदा के लोगों की राय जानेंगे और यदि वहां की जनता उन्हें अनुमति देगी, तो वह विधायक पद से भी इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि "यदि जनता मुझसे कहेगी, तो मैं सक्रिय राजनीति को भी सदा के लिए अलविदा कह दूंगा।"









