इतिहास का बड़ा उलटफेर! सऊदी की सुरक्षा के लिए तुर्की भेजेगा सैनिक, कभी थे कट्टर दुश्मन

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रियाद। ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों के बढ़ते खतरे का मुकाबला करने के लिए तुर्की, सऊदी अरब को बड़ी सैन्य मदद भेजने की तैयारी में जुट गया है। इस रणनीति के तहत तुर्की आने वाले हफ्तों में अतिरिक्त सैनिक और रक्षा उपकरण भेजने की योजना बना रहा है। हाल ही में मक्का रक्षा समझौते के तहत हुई एक अहम बैठक में तुर्की और पाकिस्तान ने सऊदी अरब में सैन्य तैनाती को लेकर अपनी सहमति जताई थी। तुर्की के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को जानकारी दी है कि अंकारा अपने अतिरिक्त उपकरण, तकनीकी और आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमें तथा लड़ाकू बल सऊदी अरब भेजेगा।

यमन में हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान

तुर्की की ओर से सऊदी अरब की मदद करने का यह महत्वपूर्ण फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब यमन में सऊदी समर्थित सरकारी सेना ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान छेड़ रखा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य हाल ही में हूतियों के कब्जे वाले क्षेत्रों को वापस अपने नियंत्रण में लेना है। यमन में दोनों पक्षों के बीच चल रही इस भीषण झड़प में अब तक 270 से अधिक सरकारी सैनिक और हूती लड़ाके मारे जा चुके हैं।

ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता की चर्चा

हूतियों के खिलाफ इस जंग में सऊदी वायुसेना यमन की सरकारी सेना को लगातार हवा से सहयोग दे रही है, जबकि तुर्की द्वारा भेजी जा रही सैन्य सहायता ने लगभग 200 साल पुरानी उस ऐतिहासिक दुश्मनी को फिर से हवा दे दी है, जब उस्मानिया सल्तनत ने सऊद राजवंश के आखिरी बादशाह को हराकर सरेआम मौत की सजा दी थी। 18वीं सदी की शुरुआत में ऑटोमन साम्राज्य और सऊदी की दिरिया अमीरात के बीच संघर्ष शुरू हुआ था, जब सऊदी बिन अब्दुलअजीज ने हेजाज क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद ऑटोमन्स ने 1813 में हेजाज को वापस अपने नियंत्रण में ले लिया। फिर 1814 में सऊदी बिन अब्दुलअजीज के निधन के बाद सत्ता उनके बेटे अब्दुल्ला बिन सऊद अल सऊदी के हाथों में आ गई थी, जिसके बाद से दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक और ऐतिहासिक समीकरण बदलते रहे हैं।