अरावली हिल्स पर बढ़ी हलचल, डूंगरपुर-बांसवाड़ा में जांच करेगी हाई पावर्ड कमेटी

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जयपुर। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई-पावर्ड कमेटी (एचपीसी) अरावली हिल्स और रेंज की परिभाषा, पारिस्थितिक स्थिति और संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की जमीनी हकीकत जांचने के लिए एक बार फिर राजस्थान का दौरा करने जा रही है। गुजरात के अरावली क्षेत्र का दौरा पूरा करने के बाद यह कमेटी आगामी 11 से 13 अक्टूबर तक राजस्थान के डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में प्रवास करेगी। इस बार कमेटी का मुख्य ध्यान वागड़ क्षेत्र के उन हिस्सों पर रहेगा जहां पहाड़ियों, जंगलों, खनन गतिविधियों और स्थानीय आदिवासियों की आजीविका के बीच गहरा संबंध है।

क्यों हुआ हाई-पावर्ड कमेटी का गठन

सुप्रीम कोर्ट ने गत 25 मई के अपने आदेश के तहत भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) के महानिदेशक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय इस उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया था। इस कमेटी का मुख्य उद्देश्य पहले तैयार की गई अरावली की परिभाषा और उसके आधार पर होने वाले भौगोलिक सीमांकन का एक स्वतंत्र एवं विशेषज्ञ स्तर पर मूल्यांकन करना है।

दोनों जिलों में प्रशासनिक तैयारियां पूरी

कमेटी के इस आगामी दौरे को लेकर राज्य सरकार ने भी चाक-चौबंद प्रशासनिक तैयारियां कर ली हैं। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी को इसके लिए फील्ड कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि डूंगरपुर और बांसवाड़ा के उप वन संरक्षक (डीसीएफ) सहित पूरा फील्ड स्टाफ पूरी यात्रा के दौरान कमेटी के साथ मौजूद रहेगा।

स्थानीय लोगों और आदिवासियों से होगा सीधा संवाद

इससे पहले भी कमेटी राजस्थान के पांच दिवसीय दौरे पर आ चुकी है, जिसके दौरान कई स्थानों पर फील्ड विजिट और हितधारकों से बातचीत की गई थी। हालांकि, उस दौरान ग्रामीण और विशेषकर आदिवासी समुदायों की पर्याप्त भागीदारी न होने की बात सामने आई थी, जिसके बाद दक्षिणी राजस्थान में एक बार फिर से जमीनी पड़ताल की मांग उठी। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने 7 सितंबर के आदेश में यह स्पष्ट निर्देश दिए थे कि कमेटी को राजस्थान और गुजरात के आदिवासी समेत सभी हितधारकों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर देना होगा। अदालत ने कमेटी को आगामी 30 नवंबर तक अपनी व्यापक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

जमीनी तथ्यों के आधार पर तैयार होगी अंतिम रिपोर्ट

अपने इस दौरे के दौरान कमेटी चयनित स्थलों पर पहुंचकर खनन, क्वारी, स्टोन क्रशर, भूमि उपयोग, वन क्षेत्रों, जलस्रोतों और आसपास के पर्यावरणीय परिदृश्य का बारीकी से आकलन करेगी। इसके अलावा, दोनों जिलों में शाम के समय विशेष बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनमें पर्यावरणविदों, विशेषज्ञों, खनन पट्टाधारकों, ग्रामीणों, किसानों, श्रमिकों और आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधियों से सीधे सुझाव लिए जाएंगे।

इस प्रकार रहेगा कमेटी का दौरा कार्यक्रम

निर्धारित शेड्यूल के मुताबिक, हाई-पावर्ड कमेटी 8 से 10 अक्टूबर तक गुजरात के अरावली क्षेत्रों का दौरा करने के बाद 11 अक्टूबर को दक्षिणी राजस्थान में प्रवेश करेगी। कमेटी 11 अक्टूबर को डूंगरपुर जिले के पालदेवल-सरकन क्षेत्र में फील्ड विजिट करेगी, जबकि 12 अक्टूबर को बांसवाड़ा जिले के केवड़िया-कोठारा क्षेत्र की पड़ताल करेगी। इन दोनों ही दिनों में शाम के वक्त लगभग तीन घंटे तक स्थानीय लोगों और अन्य हितधारकों के साथ विस्तृत और खुली चर्चा की जाएगी।