छात्रावास की समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरे विद्यार्थी, सीधे कलेक्टर से करना चाहते हैं मुलाकात

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शहडोल: शहडोल जिले के विभिन्न आवासीय छात्रावासों में रहने वाले छात्र-छात्राओं का अपनी मूलभूत समस्याओं को लेकर पैदल ही कलेक्टर से मिलने के लिए निकल पड़ना अब स्थानीय जिला प्रशासन के लिए गहरी चिंता का विषय बनता जा रहा है। बीते दो महीनों के भीतर इस प्रकार की यह लगातार पांचवीं घटना सामने आई है। ताजा मामला गोहपारू स्थित कन्या छात्रावास का है, जहाँ घटिया भोजन और जर्जर भवन जैसी गंभीर समस्याओं से तंग आकर 32 छात्राएं शनिवार तड़के करीब तीन बजे छात्रावास छोड़कर पैदल ही शहडोल जिला मुख्यालय के लिए रवाना हो गईं। छात्राओं का साफ कहना था कि वे खुद कलेक्टर से मिलकर अपनी समस्याएं बताएंगी और इस लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करेंगी।

छात्राओं के इस तरह अचानक तड़के छात्रावास छोड़कर निकलने की खबर मिलते ही छात्रावास अधीक्षिका ने तुरंत पुलिस और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी सूचना दी। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस बल तत्काल मौके पर पहुँचा और छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे रास्ते उनके साथ चलता रहा। घटना की जानकारी मिलने पर जनजातीय कार्य विभाग के डिप्टी कमिश्नर और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी तुरंत मौके पर पहुँचे। तब तक ये छात्राएं शहडोल से करीब आठ किलोमीटर पहले निपानिया गांव तक पहुँच चुकी थीं और लगभग 16 किलोमीटर से अधिक का सफर पैदल तय कर चुकी थीं।

अधिकारियों की समझाइश के बाद बस से वापस छात्रावास भेजी गईं छात्राएं

मौके पर पहुँचे एसी ट्राइबल आनंद राय सिन्हा ने छात्राओं से सीधे बातचीत कर उन्हें शांत कराया और समझाइश दी। अधिकारियों ने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि वे उचित समय पर प्रशासनिक तरीके से कलेक्टर के समक्ष अपनी पूरी बात और शिकायतें रख सकती हैं। काफी समझाइश के बाद छात्राएं वापस लौटने के लिए सहमत हुईं, जिसके बाद उन्हें विशेष बस के जरिए सुरक्षित छात्रावास वापस पहुँचाया गया। छात्रावास पहुँचकर अधिकारियों ने छात्राओं की सभी समस्याओं को विस्तार से सुना और उनके जल्द से जल्द स्थायी समाधान का आश्वासन दिया।

जैतपुर में भी सामने आया था 72 किलोमीटर पैदल मार्च का ऐसा ही मामला

इससे पूर्व जैतपुर क्षेत्र में भी छात्र-छात्राओं के इसी तरह पैदल शहडोल पहुँचने का मामला सामने आ चुका है। उस समय लगभग 200 छात्र-छात्राएं अपनी समस्याओं को लेकर करीब 72 किलोमीटर दूर स्थित कलेक्टरेट में कलेक्टर से मिलने के लिए पैदल ही निकल पड़े थे। तब अधिकारियों ने छात्रों को बीच रास्ते में ही समझाकर वापस भेज दिया था, जबकि छात्राएं शहडोल पहुँचकर अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखने में सफल रही थीं। गौरतलब बात यह है कि इस घटना से कुछ ही दिन पहले संबंधित छात्रावास में स्वयं संभागायुक्त (कमिश्नर) ने पहुँचकर छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद किया था।

जिले के छात्रावासों की बदहाल व्यवस्थाओं पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल

लगातार एक के बाद एक सामने आ रही इन गंभीर घटनाओं ने सरकारी छात्रावासों की अव्यवस्थाओं और शिकायतों के निवारण की ढुलमुल प्रक्रिया पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। आखिर छात्र-छात्राओं को अपनी जायज बात रखने के लिए आधी रात के वक्त इस तरह खतरनाक तरीके से पैदल निकलने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है? क्या जमीनी स्तर पर उनकी शिकायतों का समय पर समाधान नहीं किया जा रहा या फिर व्यवस्थाओं की निगरानी में भारी चूक हो रही है?

जनजातीय कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, गोहपारू की छात्राओं से पूरी निष्पक्षता से बातचीत की गई है और उनकी मांगों के शीघ्र निराकरण का पूरा भरोसा दिया गया है। बहरहाल, जिले के छात्रावासों में बार-बार सामने आ रहे ऐसे संवेदनशील मामलों के स्थायी समाधान के लिए संपूर्ण व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई होना बेहद अनिवार्य हो गया है।

शहडोल: शहडोल जिले के विभिन्न आवासीय छात्रावासों में रहने वाले छात्र-छात्राओं का अपनी मूलभूत समस्याओं को लेकर पैदल ही कलेक्टर से मिलने के लिए निकल पड़ना अब स्थानीय जिला प्रशासन के लिए गहरी चिंता का विषय बनता जा रहा है। बीते दो महीनों के भीतर इस प्रकार की यह लगातार पांचवीं घटना सामने आई है। ताजा मामला गोहपारू स्थित कन्या छात्रावास का है, जहाँ घटिया भोजन और जर्जर भवन जैसी गंभीर समस्याओं से तंग आकर 32 छात्राएं शनिवार तड़के करीब तीन बजे छात्रावास छोड़कर पैदल ही शहडोल जिला मुख्यालय के लिए रवाना हो गईं। छात्राओं का साफ कहना था कि वे खुद कलेक्टर से मिलकर अपनी समस्याएं बताएंगी और इस लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करेंगी।

छात्राओं के इस तरह अचानक तड़के छात्रावास छोड़कर निकलने की खबर मिलते ही छात्रावास अधीक्षिका ने तुरंत पुलिस और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी सूचना दी। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस बल तत्काल मौके पर पहुँचा और छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे रास्ते उनके साथ चलता रहा। घटना की जानकारी मिलने पर जनजातीय कार्य विभाग के डिप्टी कमिश्नर और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी तुरंत मौके पर पहुँचे। तब तक ये छात्राएं शहडोल से करीब आठ किलोमीटर पहले निपानिया गांव तक पहुँच चुकी थीं और लगभग 16 किलोमीटर से अधिक का सफर पैदल तय कर चुकी थीं।

अधिकारियों की समझाइश के बाद बस से वापस छात्रावास भेजी गईं छात्राएं

मौके पर पहुँचे एसी ट्राइबल आनंद राय सिन्हा ने छात्राओं से सीधे बातचीत कर उन्हें शांत कराया और समझाइश दी। अधिकारियों ने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि वे उचित समय पर प्रशासनिक तरीके से कलेक्टर के समक्ष अपनी पूरी बात और शिकायतें रख सकती हैं। काफी समझाइश के बाद छात्राएं वापस लौटने के लिए सहमत हुईं, जिसके बाद उन्हें विशेष बस के जरिए सुरक्षित छात्रावास वापस पहुँचाया गया। छात्रावास पहुँचकर अधिकारियों ने छात्राओं की सभी समस्याओं को विस्तार से सुना और उनके जल्द से जल्द स्थायी समाधान का आश्वासन दिया।

जैतपुर में भी सामने आया था 72 किलोमीटर पैदल मार्च का ऐसा ही मामला

इससे पूर्व जैतपुर क्षेत्र में भी छात्र-छात्राओं के इसी तरह पैदल शहडोल पहुँचने का मामला सामने आ चुका है। उस समय लगभग 200 छात्र-छात्राएं अपनी समस्याओं को लेकर करीब 72 किलोमीटर दूर स्थित कलेक्टरेट में कलेक्टर से मिलने के लिए पैदल ही निकल पड़े थे। तब अधिकारियों ने छात्रों को बीच रास्ते में ही समझाकर वापस भेज दिया था, जबकि छात्राएं शहडोल पहुँचकर अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखने में सफल रही थीं। गौरतलब बात यह है कि इस घटना से कुछ ही दिन पहले संबंधित छात्रावास में स्वयं संभागायुक्त (कमिश्नर) ने पहुँचकर छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद किया था।

जिले के छात्रावासों की बदहाल व्यवस्थाओं पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल

लगातार एक के बाद एक सामने आ रही इन गंभीर घटनाओं ने सरकारी छात्रावासों की अव्यवस्थाओं और शिकायतों के निवारण की ढुलमुल प्रक्रिया पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। आखिर छात्र-छात्राओं को अपनी जायज बात रखने के लिए आधी रात के वक्त इस तरह खतरनाक तरीके से पैदल निकलने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है? क्या जमीनी स्तर पर उनकी शिकायतों का समय पर समाधान नहीं किया जा रहा या फिर व्यवस्थाओं की निगरानी में भारी चूक हो रही है?

जनजातीय कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, गोहपारू की छात्राओं से पूरी निष्पक्षता से बातचीत की गई है और उनकी मांगों के शीघ्र निराकरण का पूरा भरोसा दिया गया है। बहरहाल, जिले के छात्रावासों में बार-बार सामने आ रहे ऐसे संवेदनशील मामलों के स्थायी समाधान के लिए संपूर्ण व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई होना बेहद अनिवार्य हो गया है।