चेन्नई। तमिलनाडु के सेलम जिले के पास स्थित मेट्टूर बांध के जलमग्न क्षेत्र तेलुंगनूर में पुरातत्व विभाग को बड़ी सफलता हाथ लगी है। खुदाई के दौरान यहां से काले और लाल रंग का एक साबुत प्राचीन कटोरा बरामद किया गया है, जो प्राचीन इतिहास और लिपि के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
3200 साल पुरानी प्राचीन लिपि के संकेत
पुरातत्व विभाग द्वारा खोजी गई इस प्राचीन कटोरी पर बाएं से दाएं पांच ग्राफिती (चिह्न) अंकित हैं। इस क्षेत्र में अब तक मिली कलाकृतियों पर दर्ज निशानों में यह सबसे लंबी श्रृंखला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज 3200 साल से भी अधिक पुरानी लेखन प्रणाली या लिपि से जुड़े अहम सुराग दे सकती है। पुरातत्वविदों का अनुमान है कि यह छठी शताब्दी ईसा पूर्व की तमिल-ब्राह्मी लिपि का शुरुआती रूप हो सकता है।
सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी समानताएं
शोधकर्ताओं के अनुसार, सेलम के पास स्थित तेलुंगनूर और मांगाडू लौह युग के जुड़वां स्थल हैं, जिनका कालखंड 1600 ईसा पूर्व से 1200 ईसा पूर्व के बीच का माना जाता है। एक अध्ययन से यह भी पता चला है कि इस क्षेत्र के विभिन्न स्थलों और सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेषों पर मिलने वाले चिह्नों में लगभग 90 प्रतिशत तक की समानता है, जो प्राचीन सांस्कृतिक आदान-प्रदान की ओर इशारा करता है।
दुर्लभ हथियार और लौह युगीन अवशेष
इस ऐतिहासिक उत्खनन स्थल से केवल मिट्टी के बर्तन ही नहीं, बल्कि कई दुर्लभ और प्राचीन सामग्रियां भी प्राप्त हुई हैं। यहां से 1.9 मीटर लंबा लोहे का भाला, तीर के अग्रभाग, कुल्हाड़ियां, तलवारें, कटार और एक संभावित प्राचीन स्टील की तलवार भी मिली है। इसके अलावा, उत्खनन के दौरान लौह युग के मानव कंकाल और चार अलग-अलग प्रकार की दफनाने की पद्धतियां (गड्ढा, पाषाण पेटिका, अस्थि कलश और शव-मंजूषा) भी देखने को मिली हैं, जो यहां एक विकसित और विविधतापूर्ण समाज के निवास करने का प्रमाण देती हैं।









