‘राहुल गांधी के दावे पर सवाल’, राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद BJP नेता रूडी ने जताई आपत्ति

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नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से विपक्षी दलों की मुलाकात के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयानों ने राजनीतिक हलकों में एक नई और तीखी बहस छेड़ दी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ सांसद राजीव प्रताप रूडी ने राहुल गांधी के इस दावे पर कड़ा ऐतराज जताया है कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के आरोपों को खारिज नहीं किया और सबूत मांगे। रूडी ने सवाल उठाया कि महामहिम राष्ट्रपति के साथ बंद कमरे में हुई बातचीत के ब्योरे को इस तरह सार्वजनिक करना और राजनीतिक बयानों का हिस्सा बनाना कितना उचित है। उनका कहना है कि विपक्ष के नेता के तौर पर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपना पूरी तरह ठीक है, लेकिन बिना किसी आधिकारिक और पुख्ता सबूत के राष्ट्रपति के हवाले से सार्वजनिक बयानबाजी करना संसदीय और संवैधानिक परंपराओं के खिलाफ है।

राष्ट्रपति के साथ हुई बातचीत को सार्वजनिक करने पर भाजपा का कड़ा ऐतराज

सांसद राजीव प्रताप रूडी ने सवाल उठाया कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति के साथ बैठक में क्या चर्चा हुई, इसे सार्वजनिक मंचों पर उछालना कितनी समझदारी है। उनके अनुसार, आम नागरिक तो दूर, कोई भी राजनीतिक नेता राष्ट्रपति से यह सार्वजनिक तौर पर नहीं कह सकता कि बंद कमरे की मुलाकात के दौरान असल में क्या बातचीत हुई थी।

रूडी ने यह भी स्पष्ट किया कि नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राहुल गांधी को राष्ट्रपति से मिलने और अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है तथा ज्ञापन सौंपना लोकतंत्र का हिस्सा है। हालांकि, उन्हें इस बात पर गंभीर आपत्ति है कि राष्ट्रपति की किसी कथित टिप्पणी को राहुल गांधी के निजी राजनीतिक बयान की तरह पेश किया जाए। रूडी का मानना है कि राहुल गांधी द्वारा दिया गया बातचीत का विवरण सही भी हो सकता है और गलत भी, लेकिन केवल ज्ञापन सौंपे जाने की पुष्टि और राष्ट्रपति द्वारा किसी प्रकार की टिप्पणी किए जाने की पुष्टि—ये दोनों बिल्कुल अलग बातें हैं। उनका मानना है कि इस तरह के बयानों से राष्ट्रपति पद की गरिमा और मर्यादा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

9 अक्टूबर की मुलाकात और विपक्ष के आरोप

ज्ञात हो कि 9 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के एक प्रमुख प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी। इस दौरान चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की चिंताओं और आशंकाओं से संबंधित एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा गया था। मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने मीडिया के सामने दावा किया था कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के आरोपों को खारिज नहीं किया है और उनसे अपने आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करने को कहा है।

विपक्षी दलों की ओर से वर्तमान में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की है। इन तमाम राजनीतिक आरोपों और counter-claims को लेकर देश की सियासत में गर्माहट बनी हुई है।

दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और CJP प्रदर्शन पर रूडी की प्रतिक्रिया

राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर किए गए व्यापक और कड़े सुरक्षा इंतजामों का समर्थन करते हुए राजीव प्रताप रूडी ने इसे पूरी तरह सामान्य बताया। बिहार में हालिया आगजनी और उपद्रव की घटनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार की सबसे पहली और प्राथमिक जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था को पूरी सख्ती से बनाए रखना है। यदि कोई तत्व सरकार को चुनौती देने या शांति व्यवस्था को खतरे में डालने की कोशिश करता है, तो प्रशासन को स्थिति से निपटने के लिए कड़े कदम उठाने ही पड़ते हैं।

दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित इस प्रदर्शन के मद्देनजर पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। प्रदर्शन की औपचारिक अनुमति नहीं मिलने के कारण सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा एजेंसियों तथा प्रदर्शनकारियों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। इस बीच, देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने भी यह स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के नाम पर राजधानी की आवश्यक परिवहन सेवाओं को पूरी तरह ठप करने के बजाय उन्हें नियंत्रित और सुचारू तरीके से संचालित रखने की व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे यह साफ होता है कि इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ आम नागरिकों की आवाजाही और उनके अधिकारों का भी संतुलन बनाया जा रहा है।