मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर भारत सख्त, कहा- तुरंत रोके जाएं हमले

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नई दिल्ली। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में लगातार गहराते सैन्य और राजनीतिक तनाव ने भारत सरकार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। इस क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं और वहां की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, जिनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना अब केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक खुली बहस के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वथनेनी हरिश ने देश का रुख स्पष्ट करते हुए हमलों को तत्काल रोकने और वार्ता शुरू करने का आह्वान किया। रियाद में एक भारतीय की दुखद मौत और भारतीय ध्वज वाले व्यावसायिक पोतों पर हुए सिलसिलेवार हमलों ने इस संकट को और अधिक गंभीर बना दिया है।

रियाद में भारतीय की मौत पर जताया शोक

विदेश मंत्रालय और राजनयिक सूत्रों के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वथनेनी हरिश ने कहा कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों में निवास करने वाले करीब एक करोड़ भारतीयों की भलाई और सुरक्षा भारत के द्विपक्षीय संबंधों का मूल आधार है। हाल ही में नागरिक ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए भारत ने रियाद में भारतीय नागरिक मोहम्मद यूसुफ अली की मौत पर गहरा दुख प्रकट किया। इस संकट की घड़ी में भारत ने सऊदी अरब की सरकार और वहां की जनता के साथ पूर्ण एकजुटता व्यक्त करते हुए उनकी संप्रभुता का समर्थन किया।

व्यापारी जहाजों और नाविकों पर हमले

अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर भारतीय ध्वज वाले और भारतीय नाविकों से लैस जहाजों पर हो रहे हमले भारत के लिए गंभीर चिंता का कारण बने हुए हैं। इस सप्ताह भारतीय ध्वज वाले 'एमवी डीपी वर्ल्ड कावेरी' पर हमला हुआ, जबकि बीते सप्ताह 'एमटी पेट्रो डॉल्फिन' और 'एमटी वाल्थेरा' को भी निशाना बनाया गया था। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा कि व्यापारिक जहाजों और निर्दोष नाविकों पर हमले न केवल कानूनन अपराध हैं, बल्कि नैतिक दृष्टिकोण से भी पूरी तरह गलत हैं। संकट के दौरान भारतीय नाविकों की सहायता करने पर भारत सरकार ने ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अधिकारियों का आधिकारिक आभार व्यक्त किया।

कूटनीति और वार्ता पर भारत का जोर

भारत ने सभी संबंधित पक्षों से तुरंत सैन्य तनाव कम करने तथा कूटनीतिक संवाद के जरिए विवादों का स्थायी समाधान निकालने की अपील की है। भारत ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री मार्गों से होने वाले व्यापार की सुरक्षा और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए। नाविकों की सुरक्षा को प्राथमिक जिम्मेदारी बताते हुए भारत ने चेतावनी दी कि यदि इस प्रकार के हमले जारी रहे तो पहले से ही संवेदनशील इस क्षेत्र की स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है।

आपातकालीन सहायता नेटवर्क का प्रस्ताव

उल्लेखनीय है कि पिछले महीने आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समुद्री नाविकों के हित में एक विशेष 'आपातकालीन सहायता नेटवर्क' स्थापित करने का दूरदर्शी प्रस्ताव रखा था। इस तंत्र का उद्देश्य संबंधित देशों के समुद्री प्राधिकारियों तथा दूतावासों को आपस में जोड़ना है, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में त्वरित अलर्ट जारी करने, तत्काल चिकित्सा सुविधा पहुंचाने, परिवारों से संपर्क कराने तथा आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित निकासी (इवेकुएशन) को सुगम बनाया जा सके।

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर संकट का खतरा

मध्य पूर्व का यह पूरा क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रमुख केंद्र है। लाल सागर और स्वेज नहर जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरों के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका उत्पन्न हो गई है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ता है, तो इसका प्रत्यक्ष व प्रतिकूल असर न केवल भारतीय प्रवासियों के जीवन पर पड़ेगा, बल्कि संपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है।