फडणवीस बोले- MLC चुनाव में महायुति का होगा दबदबा, पांचों सीटें जीतने का दावा

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मुंबई। महाराष्ट्र विधान परिषद के अंतर्गत आने वाले शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की पांच रिक्त सीटों पर होने वाले आगामी चुनावों को लेकर राज्य की सत्तारूढ़ महायुति में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सभी पांचों सीटों पर महायुति की बंपर जीत का पूर्ण भरोसा जताया है, वहीं दूसरी ओर पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी सचिन सानप को समर्थन देने की मांग को लेकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के भीतर चल रही चर्चाओं ने सियासी पारे को गरमा दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव में पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. स्मिता जाधव और पुणे शिक्षक सीट से कौस्तुभ गावडे को आधिकारिक तौर पर अपना उम्मीदवार घोषित किया है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने महायुति के सभी कार्यकर्ताओं से इन प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया है।

फडणवीस बोले- महायुति का परचम लहराएगा

चुनावी माहौल के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विश्वास जताया है कि महायुति गठबंधन विधान परिषद की सभी पांचों सीटों पर शानदार विजय प्राप्त करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. स्मिता जाधव और शिक्षक क्षेत्र से कौस्तुभ गावडे महायुति के साझा प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। फडणवीस के अनुसार, शरद लाड और भैया माने ने उनके विशेष आग्रह का आदर करते हुए डॉ. स्मिता जाधव के पक्ष में अपना नाम वापस लेने का बड़ा निर्णय लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महायुति के तीनों प्रमुख घटक दल—भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के सभी कार्यकर्ता पूर्ण आपसी तालमेल और समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं, जिससे गठबंधन के सभी उम्मीदवारों की जीत का मार्ग प्रशस्त होगा।

पुणे शिक्षक सीट पर सचिन सानप की दावेदारी

पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतरे प्रोफेसर सचिन सानप को समर्थन दिए जाने की उठी मांग ने राजनीतिक समीकरणों को रोचक बना दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना का एक स्थानीय धड़ा खुलकर सानप के समर्थन में खड़ा होने के पक्ष में है। पेशे से प्रोफेसर सचिन सानप को मंत्री उदय सामंत का करीबी माना जाता है, जिन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से मिलकर अपने पक्ष में समर्थन की अपील की है। सानप ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से भी मुलाकात कर समर्थन मांगा है और अब उनके अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका तर्क है कि शिक्षक constituency का प्रतिनिधित्व ऐसा शख्स करना चाहिए जो शिक्षकों की वास्तविक समस्याओं से भली-भांति वाकिफ हो और उनके हितों को मजबूती से उठा सके।

शिवसेना नेतृत्व के निर्देश और गठबंधन धर्म

पुणे की दोनों प्रमुख सीटें भाजपा के कोटे में जाने के बाद शिवसेना के शिंदे गुट के भीतर सुगबुगाहट और नाराजगी की खबरें भी सामने आई थीं। इसी सियासी पृष्ठभूमि के बीच शिवसेना के कुछ प्रमुख पदाधिकारियों ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से भेंट की थी। सूत्रों के अनुसार, शिंदे ने पार्टी पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे पूरी निष्ठा के साथ 'गठबंधन धर्म' का पालन करें और महायुति के भीतर आपसी समन्वय बनाए रखें। हालांकि, निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को लेकर शिवसेना की अंतिम आधिकारिक स्थिति क्या होगी, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। इसके अलावा, पुणे प्रभार संभाल रहे मंत्री उदय सामंत की भी एकनाथ शिंदे के साथ हुई बैठक ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर रखा है।

महायुति के लिए समन्वय की चुनौती

पुणे की स्नातक और शिक्षक सीटों पर प्रत्याशियों के चयन और स्थानीय स्तर पर उठ रही सुगबुगाहटों ने महायुति के भीतर एकजुटता बनाए रखने की चुनौती को थोड़ा अवश्य सामने ला दिया है। एक तरफ भाजपा अपनी दोनों सीटों पर जीत की इबारत लिखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, तो दूसरी तरफ निर्दलीय प्रत्याशी सचिन सानप भी राजनीतिक दलों और संगठनों से समर्थन हासिल करने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पांचों सीटों को जीतने का स्पष्ट लक्ष्य तय किया है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि शिवसेना का शिंदे गुट अपने आंतरिक समीकरणों को साधते हुए महायुति के साथ किस प्रकार तालमेल बिठाता है और चुनाव परिणाम किसके पक्ष में जाते हैं।