नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा संसद का एक विशेष सत्र जल्द ही बुलाए जाने की संभावना है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस माह के अंतिम सप्ताह अथवा आगामी माह के शुरुआती दिनों में दो से तीन दिनों का यह विशेष सत्र आहूत किया जा सकता है, जिसमें सरकार महिला आरक्षण और उससे जुड़े परिसीमन संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को संसद के पटल पर रख सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी भी प्रकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
संख्याबल और राजनीतिक समीकरण
संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए सदन में विशेष बहुमत यानी दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होती है। वर्तमान में लोकसभा की कुल प्रभावी सदस्य संख्या 540 है, जिसके मद्देनजर किसी भी बिल को पास कराने के लिए न्यूनतम 360 मतों की दरकार होगी। सूत्रों का कहना है कि सरकार के पास आवश्यक समर्थन जुटाने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है और इसके वास्ते विभिन्न छोटे तथा क्षेत्रीय दलों से लगातार संपर्क साधा जा रहा है। विशेष रूप से, द्रमुक (DMK) के 25 सांसदों के रुख को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं, क्योंकि हालिया घटनाक्रमों में यह दल कांग्रेस से थोड़ी दूरी बनाते हुए नजर आया है।
संभावित तिथियां और कार्यक्रम
संसद के इस विशेष सत्र की तारीखों के निर्धारण में राष्ट्रीय राजधानी में होने वाले आयोजनों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। आगामी छब्बीस और सत्ताईस अक्टूबर को संविधान सदन (संविधान सभा) में बारहवें ब्रिक्स संसदीय फोरम का भव्य आयोजन निर्धारित है। माना जा रहा है कि इन प्रमुख कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए ही सत्र की अंतिम तिथियों की घोषणा की जा सकती है। फिलहाल, सत्र के आधिकारिक एजेंडे और तारीखों का औपचारिक ऐलान होना बाकी है।









