चीनी को लेकर सरकार का बड़ा ऐलान, थोक स्टॉक लिमिट हुई दोगुनी; त्योहारों से पहले क्या बदलेगा?

0
7

केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन से ठीक पहले थोक चीनी उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की समय-सीमा को 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य आगामी त्योहारों के दौरान मांग में होने वाली बढ़ोतरी को देखते हुए औद्योगिक उपयोगकर्ताओं को अधिक परिचालन लचीलापन प्रदान करना है।

नई स्टॉक सीमा और नियम

वर्तमान में हर महीने 10 टन से अधिक चीनी का उपयोग कच्चे माल के रूप में करने वाले थोक उपभोक्ताओं को 15 दिनों की आवश्यकता के बराबर स्टॉक रखने की अनुमति थी, जिसे अब बढ़ाकर 30 दिन कर दिया गया है।

  • आयातित चीनी से पूर्ति: बढ़ी हुई 15 दिन से अधिक की स्टॉक सीमा केवल टैरिफ दर कोटा (टीआरक्यू) या अग्रिम प्राधिकरण योजना (एएएस) के तहत आयातित चीनी से ही पूरी की जा सकती है।

  • खुले बाजार का नियम: खुले बाजार से खरीदी गई चीनी के लिए 15 दिन की खपत वाली पुरानी सीमा ही लागू रहेगी।

  • स्टॉक प्रकटीकरण अनिवार्य: सभी थोक उपभोक्ताओं को प्रत्येक शुक्रवार को खाद्य मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल पर अपने चीनी स्टॉक की जानकारी दर्ज करनी होगी।

खुदरा कीमतों में गिरावट कम, उपभोक्ताओं को पूरा लाभ देने की अपील

सरकार ने स्पष्ट किया कि एक्स-मिल (कारखाना) चीनी की कीमतों में लगभग 25 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई है, जबकि खुदरा बाजारों में कीमतें अगस्त के उच्चतम स्तर 65 रुपये से घटकर केवल 58.50 रुपये प्रति किग्रा तक ही आई हैं (लगभग 10 प्रतिशत की कमी)। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव ने चीनी व्यापार निकायों और संघों के साथ बैठक में आग्रह किया कि थोक दरों में आई कमी का सीधा लाभ आम उपभोक्ताओं तक तुरंत पहुंचाया जाए ताकि त्योहारी सीजन में मिठास किफायती बनी रहे।

किसानों और उपभोक्ताओं के हित में नीति

सरकार ने स्पष्ट किया है कि गन्ना किसान और आम उपभोक्ता देश की चीनी नीति के दो प्रमुख स्तंभ हैं। 1 अक्टूबर 2026 से शुरू हो रहे नए चीनी सीजन के साथ किसानों को 365 रुपये प्रति क्विंटल का बढ़ा हुआ उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) दिया जाएगा। मंत्रालय ने प्रतिबद्धता जताई है कि चीनी की पर्याप्त उपलब्धता और उचित दरों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए बाजार पर सतत निगरानी रखी जाएगी।