मुंबई। त्वरित डिलीवरी सेवा प्रदान करने वाली प्रमुख क्विक कॉमर्स कंपनी जेप्टो के अनलिस्टेड शेयरों की कीमत में अनऑफिशियल यानी ग्रे मार्केट में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। पिछले केवल पांच कारोबारी सत्रों के भीतर कंपनी का अनलिस्टेड शेयर 23 प्रतिशत तक टूट गया है। सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को फिलहाल स्थगित करने और छोटे प्री-आईपीओ फंडरेज का विकल्प चुनने के फैसले के बाद अनलिस्टेड बाजार में जेप्टो का कुल मूल्यांकन घटकर 3.5 अरब डॉलर के नीचे आ गया है। यदि इसके सर्वकालिक उच्च स्तर से तुलना की जाए तो कंपनी के अनलिस्टेड शेयरों के दामों में अपने पीक लेवल से लगभग 60 प्रतिशत की भारी गिरावट आ चुकी है, जिससे अनऑफिशियल बाजार के निवेशकों में चिंता का माहौल व्याप्त है।
68 रुपये के ऑल-टाइम हाई से गिरकर 27 रुपये पर पहुंचा शेयर, मार्केट कैप में आई 60 फीसदी की कमी
ग्रे मार्केट के जानकारों और ट्रेडर्स के अनुसार जेप्टो के अनलिस्टेड शेयरों के थोक व्यापारिक भाव में अचानक तीव्र गिरावट देखने को मिली है। अनलिस्टेड मार्केट में जेप्टो का प्रति शेयर भाव घटकर मात्र 27 रुपये के स्तर पर आ गया है, जो महज एक सप्ताह पूर्व तक 35 रुपये तथा एक माह पहले 38 रुपये के आसपास बना हुआ था। दिसंबर 2025 के उच्चतम स्तर पर कंपनी का शेयर लगभग 68 रुपये प्रति शेयर के रिकॉर्ड स्तर पर कारोबार कर रहा था। मौजूदा 27 रुपये के भाव के आधार पर कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर लगभग 34,000 करोड़ रुपये यानी करीब 3.6 अरब डॉलर रह गया है, जो दिसंबर 2025 के 9 अरब डॉलर के मूल्यांकन की तुलना में काफी कम है।
वैल्यूएशन को लेकर निवेशकों और कंपनी में नहीं बनी सहमति, आईपीओ स्थगित होने से बिगड़ा गणित
बाजार विश्लेषकों के अनुसार जेप्टो के अनलिस्टेड शेयरों में आई इस अचानक गिरावट का मुख्य कारण प्रस्तावित आईपीओ का टलना और मूल्यांकन को लेकर पैदा हुआ गतिरोध है। कंपनी ने जुलाई में आने वाले अपने आईपीओ को रोककर 1,000 करोड़ रुपये का प्री-आईपीओ प्लेसमेंट करने की योजना बनाई है। जहां एक ओर मौजूदा शेयरधारक और कंपनी प्रबंधन 4.5 अरब डॉलर के मूल्यांकन की मांग पर अड़े हुए थे, वहीं दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) कंपनी को केवल 2.5 से 3 अरब डॉलर का मूल्यांकन देने के पक्ष में थे। वैल्यूएशन के इस बड़े अंतर और सहमति न बन पाने के कारण आईपीओ योजना को स्थगित करना पड़ा, जिसका सीधा नकारात्मक प्रभाव अनलिस्टेड शेयर के दामों पर पड़ा।
वार्षिक राजस्व में आया दो गुना उछाल, लेकिन बढ़ता घाटा और कैश बर्न बने निवेशकों की चिंता का कारण
व्यावसायिक परिचालन के मोर्चे पर जेप्टो की राजस्व वृद्धि काफी मजबूत रही है, किंतु बढ़ता शुद्ध घाटा निवेशकों के लिए लगातार चिंता का सबब बना हुआ है। वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 11,109.95 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में दोगुना होकर 22,623.58 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि, इस दौरान कंपनी का शुद्ध घाटा भी बढ़कर 5,905.19 करोड़ रुपये हो गया। वित्तीय रिपोर्टों के मुताबिक प्रतिस्पर्धी कंपनियों की तुलना में जेप्टो का कैश बर्न काफी अधिक है और कंपनी को वित्त वर्ष 2025-26 में औसतन प्रति ऑर्डर लगभग 79 रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। इसके बावजूद कंपनी वित्त वर्ष के अंत तक 1,139 डार्क स्टोर्स के विशाल नेटवर्क के माध्यम से रोजाना औसतन 17.5 लाख ऑर्डर्स का प्रसंस्करण कर रही है।









