IRDAI ने बदला बीमा वितरण का प्रस्तावित ढांचा, मिस-सेलिंग पर भी सख्ती की तैयारी

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नई दिल्ली। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) ने बीमा पॉलिसियों की बढ़ती वितरण लागत को नियंत्रित करने और बाजार में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। वर्तमान में बीमा पॉलिसियों के प्रीमियम में छिपा हुआ कमीशन एक बड़ा घटक होता है, जो बीमा कंपनियों द्वारा बैंकों, ब्रोकरों और मध्यस्थों को दिया जाता है। इस व्यवस्था में सुधार हेतु नियामक ने कई दूरगामी बदलावों का प्रस्ताव किया है।

कमीशन की सीमाओं में कटौती का प्रस्ताव

इरडा द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार, जीवन बीमा के क्षेत्र में बैंकों तथा ब्रोकरों को प्रथम वर्ष के प्रीमियम पर मिलने वाले कमीशन में भारी कटौती की जा सकती है। पूर्व में कई उत्पादों पर यह कमीशन 40 प्रतिशत से भी अधिक था, जिसे घटाकर 5 से 20 प्रतिशत के दायरे में लाने का सुझाव दिया गया है। इसके अतिरिक्त, एकमुश्त बड़े भुगतान के स्थान पर कमीशन की राशि को पॉलिसी की पूरी अवधि में आनुपातिक रूप से वितरित करने का प्रावधान किया गया है।

नियामक द्वारा कदम उठाने के कारण

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मध्यस्थों और वितरकों को दिया जाने वाला कमीशन वास्तविक कारोबार की तुलना में अधिक तीव्र गति से बढ़ा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में जीवन बीमा कंपनियों ने कमीशन मद में कुल 60,800 करोड़ रुपये का भुगतान किया, जो 18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्शाता है; जबकि इसी अवधि में प्रीमियम में वृद्धि दर मात्र 6.73 प्रतिशत रही। भारत विश्व का 10वां सबसे बड़ा बीमा बाजार होने के उपरांत भी वैश्विक औसत की तुलना में बीमा पैठ में पीछे है। इसी असंतुलन को समाप्त करने हेतु यह पहल की जा रही है।

बैंकाश्योरेंस और वित्तीय संस्थानों पर प्रभाव

बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि इस नीतिगत परिवर्तन से सर्वाधिक प्रभाव उन बैंकिंग संस्थाओं और वित्तीय मध्यस्थों पर पड़ेगा, जो बैंकाश्योरेंस मॉडल (बैंकों के माध्यम से बीमा विक्रय) के जरिए मोटा कमीशन अर्जित करते रहे हैं। इसके अतिरिक्त, डीलर-लिंक मोटर ब्रोकर तथा पूर्णतः बैंक-केंद्रित वितरण मॉडल पर निर्भर बीमा कंपनियों के परिचालन लाभ पर दबाव बढ़ सकता है।

मोटर इंश्योरेंस के कमीशन ढांचे में संशोधन

मोटर वाहन बीमा के अंतर्गत नए वाहनों हेतु अनिवार्य 'थर्ड-पार्टी मोटर बीमा' पर प्रदान किए जाने वाले 25 से 50 प्रतिशत तक के कमीशन को पूर्णतः समाप्त करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही पुराने वाहनों के पॉलिसी नवीनीकरण (रिन्यूअल) पर भी कमीशन की सीमा को अत्यंत सीमित कर दिया जाएगा।

ग्रामीण क्षेत्रों हेतु अतिरिक्त प्रोत्साहन

ग्रामीण तथा दूरस्थ क्षेत्रों में बीमा सुविधाओं की पहुंच का विस्तार करने के उद्देश्य से इन निर्धारित दरों पर 10 से 20 प्रतिशत तक का अतिरिक्त प्रोत्साहन (इंसेंटिव) प्रदान करने की व्यवस्था की गई है।

उपभोक्ताओं हेतु प्रीमियम पर संभावित प्रभाव

चूंकि कमीशन की लागत सीधे तौर पर प्रीमियम राशि में समाहित होती है, अतः वितरण लागत में कमी आने से भविष्य में बीमा पॉलिसियों के प्रीमियम दरों में गिरावट आने की संभावना है, जिससे बीमा अधिक किफायती हो सकेगा।

अनिवार्य बीमा बिक्री और मिस-सेलिंग पर रोक

नए दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन के पश्चात बैंक अपने ग्राहकों को ऋण (लोन) स्वीकृति हेतु किसी विशिष्ट बीमा पॉलिसी को क्रय करने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। यदि कोई बैंक बीमा के साथ रियायती ब्याज दर का प्रस्ताव देता है, तो उसे पारदर्शी रूप से दोनों दरों का उल्लेख करना होगा। ग्राहक किसी भी अन्य बीमा प्रदाता से पॉलिसी चुनने हेतु पूर्णतः स्वतंत्र होंगे, जिससे अनुचित बिक्री (मिस-सेलिंग) की प्रवृत्तियों पर अंकुश लगेगा।