डीजल खरीदने वालों के लिए बड़ा बदलाव, अब लिमिट से एक बूंद भी ज्यादा नहीं मिलेगा ईंधन

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नई दिल्लीकेंद्र सरकार ने सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के राजस्व घाटे को थामने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए खुदरा पेट्रोल पंपों से थोक में ईंधन (बल्क परचेज) खरीदने पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। नए दिशानिर्देशों के तहत, अब कोई भी बड़ा खरीदार आम रिटेल आउटलेट्स से ईंधन की खरीद नहीं कर सकेगा। इस बड़े फैसले के बाद मॉल, अस्पताल, बड़ी फैक्ट्रियां, ट्रैवल एजेंसियां और निजी बस संचालक, जो अब तक अपनी भारी-भरकम जरूरतों के लिए नजदीकी पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदते थे, उन्हें अब केवल अधिकृत बल्क सेल पॉइंट्स (थोक बिक्री केंद्रों) से ही तेल लेना होगा। इसी बीच, बीते शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के बीच सकारात्मक समझौते की खबरों के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत फिसलकर 86 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आ गई है।

डीजल की बिक्री पर एक दिन में 200 लीटर की अधिकतम सीमा तय

सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस नए नियम का सबसे बड़ा असर डीजल (हाई स्पीड डीजल – HSD) की बिक्री पर पड़ेगा, जिसके लिए अब प्रति वाहन एक दिन में अधिकतम 200 लीटर की सीमा (कैपिंग) निर्धारित कर दी गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि आम जनता या छोटे कमर्शियल वाहन चालक भी एक बार में या पूरे दिन में किसी भी पेट्रोल पंप से 200 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं ले पाएंगे। रिटेल आउटलेट डीलर्स को सख्त हिदायत दी गई है कि वे केवल वाहनों के मूल टैंक या पीईएसओ (PESO) से मान्यता प्राप्त कंटेनरों में ही ईंधन भरें। इसके साथ ही, खुदरा पंपों से खरीदे गए इस डीजल की दोबारा व्यावसायिक बिक्री (री-सेल) पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यह अंतरिम आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जो आगामी तीन महीनों तक प्रभावी रहेगा।

भारी मुनाफे के खेल और डायवर्जन को रोकने के लिए प्रशासनिक सख्ती

तेल कंपनियों के अधिकारियों ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि यह सख्त कदम खुदरा और थोक कीमतों के बीच पैदा हुए भारी अंतर के कारण उठाया गया है, जिसका फायदा उठाकर तेल का गलत इस्तेमाल (डायवर्जन) किया जा रहा था। उदाहरण के तौर पर, दिल्ली के खुदरा पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत जहां 95.20 रुपये प्रति लीटर है, वहीं थोक खरीदारों के लिए इसकी दर 134.50 रुपये प्रति लीटर तय है। इस ₹39.30 प्रति लीटर के बड़े अंतर के चलते थोक खरीदार कंपनियों को ऑर्डर देने के बजाय सीधे आम पंपों से गाड़ियां भरकर तेल उठा रहे थे, जिससे सरकारी कंपनियों को भारी वित्तीय चपत लग रही थी। प्रशासन का मानना है कि इस पाबंदी से आम पेट्रोल पंपों पर लगने वाली भारी भीड़ और अचानक होने वाली तेल की किल्लत से आम उपभोक्ताओं को निजात मिलेगी और वास्तविक वाहन चालकों को आसानी से ईंधन मिलता रहेगा।