SEBI के आरोपों को फिर खारिज करते हुए बोले राजेश मेहता, ‘खातों की एंट्री को सही नहीं समझा गया’

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बेंगलुरु। राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता ने मंगलवार को अपनी सहायक कंपनी एसीसी एनर्जी और प्रमोटर-नियंत्रित कंपनी एलेस्ट लिमिटेड के बीच पैसों की किसी भी तरह की हेराफेरी (डायवर्जन) के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने कंपनी के खातों में दर्ज अकाउंटिंग प्रविष्टियों को समझने में गंभीर भूल की है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कंपनी सरकार की 18,100 करोड़ रुपये की उन्नत रसायन सेल (ACC) प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना से बाहर होने के कगार पर पहुंच गई है। चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि फंड का कोई गलत इस्तेमाल नहीं हुआ है और कंपनी जांच एजेंसियों के सामने पूरा ब्योरा देने के लिए तैयार है।

सेबी ने लगाया 15 लाख करोड़ के टर्नओवर में हेरफेर का गंभीर आरोप

बाजार नियामक सेबी ने 3 जून को जारी अपने अंतरिम आदेश में राजेश मेहता के नियंत्रण वाली इन दोनों कंपनियों के बीच हुए वित्तीय सौदों पर कड़े सवाल उठाए थे। सेबी का आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2021 से 2025 के दौरान कंपनी ने अपनी सहायक इकाई के जरिए करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये का राजस्व (टर्नओवर) गलत और भ्रामक तरीके से बहीखातों में दिखाया, जो कुल घोषित राजस्व का 99.8 फीसदी हिस्सा है। नियामक ने इस संदिग्ध क्रॉस-होल्डिंग व्यवस्था के चलते राजेश मेहता पर अपनी ही मूल कंपनी के शेयरों में ट्रेडिंग करने पर अंतरिम रोक लगा दी है और खातों के फोरेंसिक ऑडिट का आदेश जारी किया है। सेबी के अनुसार, जनवरी 2025 में एलेस्ट ने बिना किसी मूल्यांकन (वैल्यूएशन) रिपोर्ट के एसीसी एनर्जी में भारी निवेश किया और होल्डिंग पैटर्न बदलकर निवेशकों को गुमराह किया, जिससे कंपनी के एमडी और सीएफओ भी पूरी तरह अनजान थे।

18,100 करोड़ रुपये की सरकारी पीएलआई योजना पर मंडराया संकट

इन गंभीर आरोपों और सेबी की सख्ती के बाद भारी उद्योग मंत्रालय भी पूरी तरह एक्शन में आ गया है। मंत्रालय इस बात की गहन समीक्षा कर रहा है कि क्या राजेश एक्सपोर्ट्स को देश के इस महत्वाकांक्षी बैटरी विनिर्माण कार्यक्रम से अयोग्य घोषित कर दिया जाए। यह योजना भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें यह कंपनी एक मुख्य भागीदार है। इस विवाद के बीच चेयरमैन ने कहा कि परियोजना के क्रियान्वयन में उचित प्रगति हुई है, लेकिन तकनीकी अनुसंधान और विकास (R&D) में कुछ अतिरिक्त समय लग रहा है। इसी देरी का हवाला देते हुए कंपनी ने सरकार से परियोजना को पूरा करने के लिए एक वर्ष का अतिरिक्त समय (एक्स्टेंशन) देने की आधिकारिक मांग की है।

कर्नाटक के हुबली में 65 फीसदी पूरा हुआ देश का पहला स्वदेशी बैटरी प्लांट

कंपनी के चेयरमैन राजेश मेहता ने परियोजना की वर्तमान स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि वे दुनिया की सबसे आधुनिक और 100 प्रतिशत स्वदेशी तकनीक पर आधारित बैटरी सेल विकसित करने पर काम कर रहे हैं। इस नए आविष्कार की जटिलता के कारण ही समय सीमा में थोड़ा बदलाव हुआ है। उन्होंने बताया कि कर्नाटक के हुबली में स्थापित किया जा रहा एसीसी बैटरी संयंत्र का निर्माण कार्य लगभग 60 से 65 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। हालांकि कंपनी इस प्रोजेक्ट को तय समय सीमा यानी 2025 के अंत तक शत-प्रतिशत पूरा नहीं कर पाई है, लेकिन प्रोग्रेस पूरी तरह संतोषजनक है और इस संबंध में भारी उद्योग मंत्रालय को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए लिखित स्पष्टीकरण सौंप दिया गया है।