मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में लगातार चार दिनों से जारी तेजी के सिलसिले पर गुरुवार सुबह अचानक ब्रेक लग गया। बाजार के प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत गिरावट के साथ लाल निशान में हुई। शुरुआती कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 111.23 अंक टूटकर 77,044.39 के स्तर पर आ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 26.85 अंकों की सुस्ती के साथ 24,058.85 पर कारोबार करता देखा गया। शेयर बाजार में आई इस गिरावट के साथ-साथ विदेशी मुद्रा बाजार में भी कमजोरी दर्ज की गई, जहां अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 21 पैसे कमजोर होकर 94.71 के स्तर पर पहुंच गया।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक के सख्त रुख से टूटा बाजार
घरेलू बाजार में अचानक आई इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अपनाए गए कड़े तेवर माने जा रहे हैं। अमेरिका में महंगाई की दर लगातार ऊंचे स्तर पर बने रहने के कारण फेड की ओपन मार्केट कमेटी ने बाजार को सख्त संकेत दिए हैं, जिससे इस वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में और इजाफा होने की आशंका बढ़ गई है। इस घोषणा के बाद अमेरिका में 10 साल के बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 4.46 प्रतिशत हो गई, जिसके चलते अमेरिकी बाजारों में भारी बिकवाली का माहौल देखा गया और वैश्विक स्तर पर निवेशकों की चिंताएं बढ़ गईं। फेड के नए प्रमुख के इस अप्रत्याशित और सख्त फैसले ने बाजार के जानकारों को भी हैरान किया है, क्योंकि वे हमेशा से ब्याज दरों में कटौती की वकालत करते रहे हैं।
कच्चे तेल में नरमी और भू-राजनीतिक मोर्चे से राहत
वैश्विक स्तर पर मचे इस घमासान के बीच भारतीय निवेशकों के लिए कुछ सकारात्मक संकेत भी मिल रहे हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कम होने और वहां शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों से भारतीय बाजार धीरे-धीरे अपनी रिकवरी कर सकता है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट से देश में महंगाई का दबाव कम होने की संभावना है, जिससे अर्थव्यवस्था के बाहरी मोर्चे को काफी सहारा मिलेगा। वहीं अगर दुनिया के अन्य शेयर बाजारों की बात करें तो जापान के टॉपिक्स और अमेरिकी एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में मजबूती देखी गई, जबकि हांगकांग के हैंग सेंग और यूरोप के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट का रुख रहा।
एचडीएफसी बैंक ने रचा नया वित्तीय इतिहास
शेयर बाजार के इस उतार-चढ़ाव भरे घटनाक्रम के बीच देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के ऋणदाता, एचडीएफसी बैंक ने एक विशेष उपलब्धि अपने नाम की है। बैंक ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की '1.5% फिक्स्ड-रेट स्वैप फैसिलिटी' योजना का उपयोग करते हुए 750 मिलियन डॉलर का विदेशी वाणिज्यिक कर्ज (ECB) जुटाया है। इस विशेष सरकारी योजना का लाभ उठाने वाला एचडीएफसी बैंक पूरे देश का पहला वित्तीय संस्थान बन गया है। बैंक ने इस 5 साल की अवधि वाले विदेशी बॉन्ड को अपनी 'गिफ्ट सिटी' शाखा के माध्यम से जारी किया है, जो बैंकिंग सेक्टर में इसकी मजबूत पकड़ और साख को प्रदर्शित करता है।









