शानदार GDP के बावजूद शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 788 अंक टूटा

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भारतीय शेयर बाजार में बुधवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत भारी बिकवाली के साथ हुई। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिका-ईरान संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी के कारण घरेलू निवेशकों का भरोसा डगमगा गया। इस वैश्विक दबाव के आगे घरेलू जीडीपी के मजबूत आंकड़े भी फीके पड़ गए। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 788.52 अंक लुढ़ककर 76,155.76 पर और निफ्टी 269 अंक टूटकर 23,786.80 के स्तर पर आ गया। वहीं, भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 2 पैसे कमजोर होकर 94.97 पर खुला।

कच्चे तेल में उछाल और वैश्विक ब्याज दरों का बढ़ता दबाव

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय अनिश्चितता और 'रिस्क-ऑफ' का माहौल बना हुआ है:

  • कच्चे तेल की कीमतों में तेजी: ईरान तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड रातों-रात 5 प्रतिशत उछलकर 96 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जिससे वैश्विक स्तर पर लंबे समय तक महंगाई बने रहने की आशंका बढ़ गई है।

  • केंद्रीय बैंकों की सख्ती: यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) और बैंक ऑफ जापान (BOJ) द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं ने वैश्विक बॉन्ड यील्ड्स और लिक्विडिटी पर दबाव और बढ़ा दिया है।

मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था बनाम वैश्विक संकट

भारतीय बाजार इस समय दो परस्पर विरोधी कारकों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। जहां एक ओर पहली तिमाही के उत्कृष्ट जीडीपी आंकड़े, बेहतर जीएसटी संग्रह, मजबूत क्रेडिट ग्रोथ और ऑटोमोबाइल बिक्री देश की आर्थिक बुनियाद को मजबूती दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया में युद्ध के हालात और विदेशी बाजारों की गिरावट घरेलू सेंटिमेंट पर भारी पड़ रही है।

मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार से भारत को राहत

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिति मजबूत बनी हुई है:

  • विदेशी मुद्रा भंडार: देश के पास लगभग 730 अरब डॉलर का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार उपलब्ध है, जो बाहरी झटकों को सहन करने के लिए पर्याप्त है।

  • चालू खाता घाटा: चालू खाता घाटा (CAD) जीडीपी के महज 0.5 प्रतिशत पर सीमित है, जो वित्तीय स्थिरता का संकेत देता है।

  • अन्य परिसंपत्तियां: वैश्विक उथल-पुथल के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव में भी 0.86 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 4,291.35 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और एशियाई बाजारों में गिरावट

आने वाले दिनों में बाजार की चाल तय करने में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है। यदि अमेरिका के 10-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड 5 प्रतिशत के स्तर तक पहुंचती है, तो वैश्विक इक्विटी बाजारों में और बड़ा करेक्शन देखने को मिल सकता है। इसका असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा, जहां जापान का निक्केई 2.81%, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.44% और हांगकांग का हैंगसेंग 1.17% तक टूट गया। अल्पकाल में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।