टाटा कंपनी को बड़ा झटका, मुनाफे से घाटे में आई; शेयर धड़ाम

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मुंबई। शेयर बाजार में कारोबार बंद होने के बाद टाटा समूह की प्रमुख केमिकल कंपनी टाटा केमिकल्स के वित्तीय नतीजे सामने आने के बाद निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। जून तिमाही में कंपनी के मुनाफे से सीधे घाटे में आने के कारण आज बाजार खुलते ही इसके शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। इस तेज दबाव के चलते कंपनी का शेयर तीन प्रतिशत से अधिक लुढ़क गया। कारोबार के दौरान निचले स्तरों पर थोड़ी लिवाली आने के बावजूद शेयर में कोई खास रिकवरी देखने को नहीं मिली और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर यह सुस्त कारोबार करता नजर आया।

मुनाफे से सीधे घाटे में फिसली कंपनी

चालू वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून 2026 के दौरान टाटा केमिकल्स का प्रदर्शन कमजोर रहा है। समेकित आधार पर कंपनी पिछले साल की समान अवधि के 252 करोड़ रुपये के शुद्ध मुनाफे से इस बार सीधे 17 करोड़ रुपये के घाटे के दायरे में आ चुकी है। हालांकि इस दौरान कंपनी के परिचालन से होने वाले राजस्व में करीब 14.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह बढ़कर 4,255 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। प्रबंधन का कहना है कि उत्पादों की कम कीमतें, अन्य स्रोतों से होने वाली आय में कमी और संयुक्त उद्यमों के कमजोर प्रदर्शन के कारण मुनाफे पर बुरा असर पड़ा है।

परिचालन मोर्चे पर भी दिखा चौतरफा दबाव

कंपनी के ऑपरेशनल मोर्चे की बात करें तो वहां भी स्थिति चुनौतीपूर्ण नजर आई है। समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी का एबिटा पिछले साल के 649 करोड़ रुपये से करीब 14.5 प्रतिशत घटकर 555 करोड़ रुपये पर सिमट गया। इसके साथ ही परिचालन मार्जिन भी 17.5 प्रतिशत से लुढ़ककर 13 प्रतिशत के स्तर पर आ गया। आपको बता दें कि टाटा केमिकल्स मुख्य रूप से ग्लास, डिटर्जेंट, औद्योगिक और विभिन्न केमिकल क्षेत्रों को कच्चे माल की आपूर्ति करने वाली बड़ी कंपनी है, जिसकी सहायक इकाई रैलिस इंडिया के जरिए कृषि सुरक्षा क्षेत्र में भी मजबूत पकड़ है।

शेयरों के पिछले एक साल के उतार-चढ़ाव

टाटा केमिकल्स के शेयरों ने पिछले एक साल के दौरान निवेशकों के पोर्टफोलियो में काफी उतार-चढ़ाव दिखाए हैं। बीते वर्ष 17 सितंबर 2025 को बीएसई पर इस शेयर ने 1,026.00 रुपये का उच्च स्तर छुआ था, जो इसका एक साल का रिकॉर्ड शिखर है। हालांकि इस ऊंचाई से फिसलने के बाद शेयर में लगातार गिरावट आई और यह छह महीने के भीतर 30 मार्च 2026 को टूटकर 581.30 रुपये के अपने एक साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया था, जिसके बाद से इसमें रिकवरी के प्रयास जारी हैं।