दान करना हमेशा अच्छे फल देता है. भगवान में आस्था रखने वाले, धर्मपरायण लोग, दयालु स्वभाव वाले, गरीबों के प्रति करुणा रखने वाले और अच्छे कर्मों का फल चाहने वाले लोग दान करते हैं. लेकिन कुछ लोग जरूरत से ज्यादा दान कर देते हैं, तो कुछ लोग अयोग्य लोगों को दान देकर खुद के लिए मुसीबत बुला लेते हैं. आचार्य चाणक्य के अनुसार, दान देने में भी विवेक जरूरी है. गलत दान आपको गरीब बना सकता है. इसलिए यह जानना बहुत जरूरी है कि कब दान देना चाहिए और कब नहीं.
हिंदू धर्म में दान को उदारता और धर्म का प्रतीक माना जाता है, लेकिन आचार्य चाणक्य ने इसे केवल भावनाओं से नहीं बल्कि बुद्धिमत्ता से जोड़कर देखा है. उनके अनुसार, बिना विचार किए किया गया दान कई बार व्यर्थ साबित हो सकता है. चाणक्य नीति में दान को लेकर कुछ ऐसे नियम बताए गए हैं, जो आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने प्राचीन समय में थे. सही समय, सही स्थान और योग्य व्यक्ति को दिया गया दान ही फलदायी होता है. यही कारण है कि चाणक्य ने दान से पहले कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देने की सलाह दी है. अगर इन 7 बातों को समझकर दान किया जाए तो ना केवल समाज को लाभ मिलता है बल्कि दाता को भी सकारात्मक फल प्राप्त होता है.
आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में कहा है कि जो लोग धर्म के नाम पर अपनी सारी संपत्ति दान कर देते हैं, वे हमेशा आर्थिक संकट में रहते हैं. कई लोग मानते हैं कि दान देने वाला अमीर बनता है. इसलिए दान करते समय वे यह भी नहीं सोचते कि उनके पास खुद के लिए कुछ बचा है या नहीं. ऐसे लोग मुसीबत में पड़ जाते हैं. इतिहास में कई उदाहरण हैं जब राजाओं ने अत्यधिक दान देकर अपनी संपत्ति गंवा दी. राजा हरिश्चंद्र की कहानी इसका उदाहरण है.
चाणक्य आगे कहते हैं कि अयोग्य वे हैं जो दान के लायक नहीं हैं. अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को गाय दान कर दें, जो उसकी देखभाल नहीं कर सकता, तो क्या वह जीवित रह पाएगी? इसी तरह अगर आप किसी को करोड़ों रुपए दे दें और वह उसे संभाल ना सके तो वह उसे नहीं रख पाएगा. इसलिए पहले योग्य व्यक्ति की पहचान करें और फिर दान करें.
कृतघ्न वे हैं जो उपकार को याद नहीं रखते. जो आपसे दान लेकर भी उसे याद नहीं रखते, आपके उपकार को भूल जाते हैं, आपके भले की कामना नहीं करते, बल्कि आपके बुरे की सोचते हैं. ऐसे लोगों को दान देना अपने ही खाने में जहर मिलाने जैसा है.
चाणक्य नीति में आगे कहते हैं कि जो लोग सिर्फ दिखावे के लिए दान करते हैं, उन्हें दान का पुण्य नहीं मिलता और वे गरीबी का शिकार भी हो सकते हैं. कई बार ऐसे लोग अपनी आर्थिक स्थिति छुपाने के लिए अपनी बची-खुची रकम भी दान कर देते हैं और बाकी चीजों पर ज्यादा खर्च कर देते हैं. ऐसे में उन्हें संकट का सामना करना पड़ सकता है.
चाणक्य कहते हैं कि बहुत से लोग दान कर देते हैं और यह भी नहीं देखते कि उसको इसकी जरूरत है भी या नहीं. या बस अपने मन की संतुष्टि के लिए ही दान कर देते हैं और आजकल ऐसा बहुत देखने को मिल रहा है. चाणक्य कहते हैं कि दान करते समय सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि आपका दान किसी की जिंदगी को बर्बाद भी कर सकती है. क्योंकि आप तो दान करते हैं लेकिन आज कल यह एक बिजनेस बन चुका है और लोग काम करने के बजाय भीख मांगना ज्यादा आसान लगता है.
दान करते समय सतर्क रहें. चाणक्य के अनुसार, मंदिर जाकर दान करने से भगवान की कृपा मिलती है. आप सोमवार को शिवजी को, शनिवार को शनिदेव को, गुरुवार को भगवान विष्णु के मंदिर में, शुक्रवार को माता लक्ष्मी को, मंगलवार को हनुमानजी को, बुधवार को कालभैरव को और रविवार को देवी मंदिर में दान कर सकते हैं.









