Friday, June 21, 2024
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खरना के साथ छठ महापर्व की शुरुआत, जानें खरना से लेकर अर्घ्य देने की तिथि मुहूर्त और महत्व

Chhath Puja 2023 : छठ महापर्व की शुरुआत कार्तिक मास की षष्ठी तिथि से होती है। छठ महापर्व 4 दिनों तक चलता है। नहाय खाय से इस पर्व की शुरुआत होती है। इस पर्व के दौरान सूर्य देव और छठी मैया की पूजा-अर्चना की जाती है। छठ का व्रत महिलाएं अपनी संतान की सलामती और उज्ज्वल भविष्य के लिए करती हैं। छठ पर्व के पहले दिन नहाए खाय मनाया जाता है। छठ मनाने वाले लोगों में इस दिन का विशेष महत्व है। यह व्रत बच्चों की दीर्घायु, सफलता और उनके स्वास्थ्य के लिए किया जाता है। आइए जानते हैं छठ महापर्व कब से शुरु होगा।

बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाता

छठ पूजा का आरंभ कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 17 नवंबर से हो रहा है। लोक आस्था का यह महापर्व छठ 4 दिनों तक चलता है। छठ के पहले दिन नहाय खाय से होती है। छठ पूजा के दौरान छठी मैय्या की पूजा अर्चना की जाती है। छठ महापर्व बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश की कई जगहों पर धूमधाम से मनाया जाता है। छठ पूजा संतान के स्वास्थ्य, सफलता और उनकी दीर्घायु के लिए की जाती है। यह व्रत केवल महिलाएं ही नहीं बल्कि घर के पुरुष भी रखते हैं। आइए जानते हैं छठ पूजा की तारीख और महत्व।

नहाया खाया के शुरू

नहाय खाय के साथ छठ महापर्व का आरंभ हो जाता है। इस दिन व्रत रखने वाली महिला और पुरुष सिर्फ एक समय ही भोजन करते हैं। साथ ही भोजन ग्रहण करने से पहले सूर्य भगवान को भोग लगाया जाता है। इस दिन अपने घर के पास किसी पवित्र नदी या कुंड में जाकर स्नान भी किया जाता है। स्नान करने से बाद साफ वस्त्र धारण करके ही भोजन ग्रहण करना होता है। इस दिन चने की दाल और लौकी की सब्जी बनाई जाती है। साथ ही पहले दिन व्रत रखने वाले पहले खाना खाते हैं इसके बाद ही परिवार के बाकी लोग भोजन ग्रहण करते हैं।

दूसरे दिन खरना

छठ महापर्व के दूसरे दिन खरना किया जाता है। खरना का मतलब है शुद्धिकरण। व्रती इस पूरे दिन उपवास रखती है। फिर शाम के समय मिट्टी के नए चूल्हे पर गुड़ की खीर प्रसाद के रूप में बनाई जाती है। इसी प्रसाद को व्रती ग्रहण करते हैं। फिर इस प्रसाद को बाकी लोगों में बांटा जाता है। इसके बाद से 36 घंटे का लंबा निर्जला उपवास शुरू होता है।

तीसरा दिन संझिया घाट

छठ पूजा के तीसरे दिन यानी संझिया घाट को अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इससे पहले व्रत रखने वाली महिलाएं सूर्य निकलने से पहले रात को मिश्री युक्त पानी पीती हैं। उसके बाद शाम के समय सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है। सूर्य देव की उपासना के लिए इस दिन तरह तरह के पकवान ठेकुआ और मौसमी फल आदि अर्पित किए जाते हैं। डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का समय : 19 नवंबर को शाम में 5 बजकर 27 मिनट तक।

उगते सूर्य को अर्घ्य

छठ पूजा के चौथे दिन यानी भौरखा घाट 20 नवंबर 2023 को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। सूर्य देव को अर्घ्य देते समय संतान और परिवार की सुख शांति बनाए रखने की कामना की जाती है। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत का समापन किया जाता है।
उगते सूर्य को अर्घ्य देने का समय : 20 नवंबर को सुबह 6 बजकर 47 मिनट पर।

नहाय खाय का महत्व

नहाय खाय जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट होता है – स्नान करके भोजन करना। इस दिन नहाय खाय के दिन व्रत करने वाली महिलाएं नदी या तालाब में स्नान करती हैं। इसके बाद कच्चे चावल का भात, चना दाल और कद्दू या लौकी का प्रसाद बनाकर उसे ग्रहण करती हैं। माना जाता है कि नहाय खाय का यह भोजन साधक में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है। साथ ही यह भी माना जाता है कि इस दिन व्रत करने वाले साधक इस सात्विक द्वारा खुद को पवित्र कर छठ पूजा के लिए तैयार होते हैं।

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