Home धर्म इतनी कठिनाइयां झेलकर भी भक्त करते हैं गिरनार परिक्रमा, जानें धार्मिक महत्व

इतनी कठिनाइयां झेलकर भी भक्त करते हैं गिरनार परिक्रमा, जानें धार्मिक महत्व

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Girnar Parikrama: कहा जाता है कि सदियों पहले श्री कृष्ण ने बहन सुभद्रा की शादी अर्जुन से करवाने के लिए ये परिक्रमा की थी. कार्तिकी एकादशी से पूनम का वो दिन था.

आखिर पूनम के दिन सुभद्रा की शादी अर्जुन से हुई थी. वो जगह है बोरदेवी जहां ये परिक्रमा समाप्त होती है. तब से ये परिक्रमा की जाती है. बाद में हेजा भगत ने अपने दस साथियों के साथ परिक्रमा की थी. आज 2022 में पंद्रह लाख यात्री हैं. माना जाता है कि महादेव शंकर, ब्रह्मा विष्णु और पांच पांडव सभी ने ये परिक्रमा की है, इसीलिए लाखों लोग परिक्रमा करते हुए भक्ति भजन करते हुए बड़े भाव से ये परंपरा निभाते है.

गुजरात का सबसे ऊंचा पर्वत गिरनार जो हिमालय का भी दादा माना जाता है. गिरनार पर्वत के चारों ओर 33 कोटि देवताओं का वास है. इसीलिए लाखों लोग पैदल चलकर ये 36 किमी. की ये कठिन परिक्रमा करते हैं. गाढ़ जंगल के बीच ऊंची चढ़ाई और 50 से भी ज्यादा शेर और तेंदुए इस जंगल में रहते हैं पर आज तक किसी यात्री को कोई मुश्किल नहीं आई है. ये एक आस्था, श्रद्धा और विश्वास की परिक्रमा मानी जाती है.

क्या क्या होता है खास परिक्रमा मेले में ?

दरअसल, कार्तिक एकादशी के दिन शुरू होने वाली इस परिक्रमा के दो दिन पहले ही वन विभाग ने जंगल का इटवा गेट 2 सुबह 6 बजे खोल दिया था. अब तक 2 लाख लोगों ने परिक्रमा पूर्ण की और चार दिन में और 12 लाख लोग करेंगे.

लाखों लोगों के लिए ये सुविधाएं

1. 100 से भी ज्यादा भंडारा जिसम 24 घंटो खाना चाय फ्री
2. 2234 पुलिस कर्मी तैनात
3. 12 वन कर्मियों की चौकी जो यात्रियों की सुरक्षा करती है
4. 50 आरोग्य केंद्र
5. 45000 सेवक जो भंडारों में खाना बनाने काम करते है
6. रेल विभाग ने खास दो ट्रेन शुरू की ओर 14 ट्रेनों में कोच बढ़ाए गए.
7. राज्य नगर निगम ने 260 बसों सिर्फ ये मेले के लिए तैनात की
8. 5 एनजीओ में 300 से भी ज्यादा सभ्यो परिक्रमा यात्रियों को वन सुरक्षा की जागृति फेलाने का काम करते है
9. प्लास्टिक की बैग के बदले कपड़े की या कागज की बैग देते है.
10. भंडारों 300 करोड़ का खाने का सामान का उपयोग करेंगे
11. प्रशाशन की ओर से 5 इमरजेंसी 108 की सेवा और 8 एंबुलेंस तैनात रखी गई.

गिरनार परिक्रमा मेला धार्मिक परंपरा है और लोग नदी के प्रवाह की तरह आते है और जाते है, वृद्ध पेढ़ी के साथ युवा और बच्चे भी ये परंपरा निभाते है और प्रकृति का आनंद लेते हुए परिक्रमा पूर्ण करते है.
 

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