भगवान शिव का प्रिय माह सावन चल रहा है. इस दौरान भोलेनाथ की आराधना का विशेष महत्व माना गया है. वैसे तो भगवान एक लोटा जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं लेकिन भक्त मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर भगवान की प्रिय और शुभ वस्तुएं अर्पित करते हैं. हालांकि कुछ चीजें शिव पूजा में वर्जित मानी गई हैं. इन्हीं में केतकी का फूल भी शामिल है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, केतकी भगवान विष्णु को प्रिय है लेकिन महादेव को यह फूल अर्पित नहीं किया जाता. शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और भांग चढ़ाने की परंपरा है. उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, केतकी फूल को शिव पूजा में न चढ़ाने के पीछे ब्रह्मा-विष्णु के विवाद और भगवान शिव के क्रोध से जुड़ी पौराणिक कथा मानी गई है. आइए जानते हैं कि क्यों यह पुष्प शिव पूजा में निषेध माना गया है.
शास्त्रों के अनुसार, शिव पुराण को विशेष महत्व दिया जाता है. इसी पवित्र ग्रंथ की एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, एक बार सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा और पालनकर्ता भगवान विष्णु के बीच इस बात को लेकर मतभेद हो गया कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है. यह विवाद इतना गहरा हो गया कि अंततः मामला स्वयं महादेव तक पहुंचा. तब भगवान शिव ने अपनी दिव्य शक्ति से एक विशाल और अनंत शिवलिंग प्रकट किया और दोनों से कहा कि जो इसका आदि और अंत खोज लेगा, वही सर्वश्रेष्ठ माना जाएगा. इस चुनौती को स्वीकार करते हुए ब्रह्माजी नीचे की दिशा में गए और विष्णुजी ऊपर की ओर बढ़े लेकिन अनंत प्रयासों के बावजूद वे शिवलिंग का आदि और अंत नहीं खोज सके. अंततः भगवान विष्णु को सत्य का आभास हुआ और उन्होंने महादेव के समक्ष नतमस्तक होकर अपनी भूल स्वीकार की, जिससे शिव की सर्वोच्चता सिद्ध हुई.
केतकी पुष्प ने बोला झूठ
भगवान विष्णु के हार स्वीकार करने के बाद ब्रह्माजी महादेव के समक्ष लौटे. असंख्य प्रयासों के बावजूद वह भी शिवलिंग का आदि-अंत नहीं खोज पाए थे. निराश होकर वापस आते समय उन्हें मार्ग में केतकी पुष्प दिखाई दिया. अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए ब्रह्माजी ने केतकी को अपनी बात का समर्थन करने के लिए मनाया और उससे झूठी गवाही देने का आग्रह किया. इस प्रकार उन्होंने शिव के सामने झूठ बोलने का निर्णय लिया.
पुष्प को मिला श्राप
ब्रह्माजी के कहने पर केतकी पुष्प भगवान शिव के पास ब्रह्माजी के साथ पहुंचा. ब्रह्माजी ने भगवान शिव से कहा कि उन्होंने अंत ढूंढ लिया है और इसका सबूत यह केतकी का फूल है. भगवान शिव को पता था कि वह झूठ बोल रहे हैं. केतकी के फूल के झूठ बोलने के बाद भगवान शिव ने क्रोधित होकर ब्रह्मा का पांचवां सिर काट दिया और केतकी के फूल को श्राप दिया कि उसका इस्तेमाल उनकी किसी भी पूजा में नहीं किया जाएगा, इसलिए भगवान शिव की पूजा में केतकी का फूल वर्जित माना जाता है.









