Saturday, June 22, 2024
Homeधर्मशिवलिंग पर जानें जल चढ़ाने का सही तरीका

शिवलिंग पर जानें जल चढ़ाने का सही तरीका

Shivling Puja: कहा जाता है कि भोलेनाथ इतने भोले हैं कि एक लोटा जल चढ़ाने से प्रसन्न हो जाते हैं। हर क्लेश हर लेते हैं। शास्त्रों में शिवलिंग पूजा-पाठ के कुछ विशेष नियम बनाए गए हैं जैसे- पूजा के दौरान हमेशा सिर ढककर खड़े हों, सुहागिन स्त्रियां सोलह श्रृंगार करें, कभी भी अखंडित अक्षत भगवान् को न चढ़ाएं, गणेश जी को भूलकर भी तुलसी दल न चढ़ाएं। ऐसे ही कुछ नियम शिव लिंग के पूजन से भी जुड़े हुए हैं। शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से तीनों लोक में धनवान बना देते हैं। शिव जी को प्रसन्न करने के लिए उनका अभिषेक करते हैं। भक्त उन्हें पंचामृत, दूध या जल का अभिषेक करते हैं। कहते हैं कि शिवलिंग पर चढ़ाने वाले जल में अगर ये खास चीज डालकर चढ़ाएंगे तो मिनटों में पूरी होगी मनोकामना।

पूर्व दिशा की ओर मुंह करके जल न चढ़ाए

महादेव को जल चढ़ाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कभी भी पूर्व दिशा की ओर मुंह करके जल न चढ़ाएं। पूर्व दिशा को भगवान शिव का मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिशा में मुख करने से शिवजी के द्वार में बाधा उत्पन्न होती है और वह रुष्ट भी हो सकते हैं।

इस दिशा में कभी भी जल ना चढ़ाएं

उत्तर दिशा की ओर मुख करके जल चढ़ाए उत्तर दिशा की ओर मुख करके शिवजी को जल अर्पित करें। ऐसा कहा जाता है कि इस दिशा की ओर मुख करके जल चढ़ाने से शिव और पार्वती दोनों को आशीर्वाद मिलता है।
शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए सबसे अच्छे पात्र तांबे, चांदी और कांसे के माने जाते हैं। भूलकर भी स्टील के पात्र से शिवलिंग पर जल नहीं चढ़ाना चाहिए इससे शिव जी रुष्ट हो जाते हैं। पंडित जी बताते हैं कि जल अर्पण के लिए सर्वोत्तम पात्र तांबे का है। इसलिए इसी पात्र से जल चढ़ाना उत्तम है। लेकिन भूलकर भी तांबे के पात्र से शिव जी को दूध न चढ़ाएं क्योंकि तांबेमें दूध विष के समान बन जाता है।
जलाभिषेक करते समय शांत मन से धीरे-धीरे जल अर्पित करना चाहिए। मान्यता है कि जब हम धीमी धार से महादेव का अभिषेक करते हैं तो महादेव विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं। भोलेनाथ को कभी भी बहुत तेज या बड़ी धारा में जल नहीं चढ़ाना चाहिए।

बैठकर चढ़ाएं जल

हमेशा शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय ध्यान रखें कि बैठकर ही जल अर्पित करें। कभी भी शिवलिंग पर शंख से जल नहीं चढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से शिव कृपा प्राप्त नहीं होती है। शिवपुराण के अनुसार, शिवजी ने शंखचूड़ नाम के दैत्य का वध किया था। ऐसा माना जाता है कि शंख उसी दैत्य की हड्डियों से बने होते हैं। इसलिए शिवलिंग पर शंख से जल नहीं चढ़ाना चाहिए।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments