300 साल पुराने नीम-पीपल के अद्भुत संगम में विराजते हैं शिव-शक्ति, जानिए शिवहर के बाबा भुवनेश्वर नाथ की महिमा

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जिले में स्थित प्रसिद्ध बाबा भुवनेश्वर नाथ मंदिर परिसर में प्रकृति और धर्म का एक अत्यंत दुर्लभ और अद्भुत संगम देखने को मिलता है. यहां परिसर में मौजूद लगभग ढाई से तीन सौ वर्ष पुराना नीम और पीपल का पेड़ आपस में इस प्रकार लिपटा हुआ है कि वह देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देता है. स्थानीय श्रद्धालुओं और आचार्यों की अटूट मान्यता है कि इस अनोखे वृक्ष युग्म में साक्षात भगवान शिव और माता पार्वती (शक्ति) एक साथ विराजमान हैं. पिछले डेढ़ सौ से अधिक वर्षों से इस पावन स्थल पर दूर-दूर से श्रद्धालु खिंचे चले आते हैं और अत्यंत श्रद्धा व भक्ति भाव के साथ पूजा-अर्चना करते हैं.

क्या कहते हैं मंदिर के पुजारी
​मंदिर के पुजारी प्रशांत भारती के अनुसार, इस पवित्र वृक्ष का इतिहास स्वयं बाबा भुवनेश्वर नाथ मंदिर जितना ही प्राचीन और ऐतिहासिक है. शुरुआत में यहां केवल नीम का एक विशाल वृक्ष हुआ करता था, जिसके समीप कालंतर में पीपल का पौधा प्राकृतिक रूप से अंकुरित होकर विकसित हो गया. धीरे-धीरे दोनों वृक्ष परस्पर एक-दूसरे के तने और शाखाओं से लिपटते चले गए और आज वे एकाकार हो चुके हैं. सबसे आश्चर्यजनक और दिव्य बात यह है कि सदियों का समय बीत जाने और विविध मौसमी बदलावों के बावजूद यह वृक्ष कभी सूखता नहीं है, बल्कि सदैव हरा-भरा बना रहता है.
दो वृक्षों का अद्भुत मेल
​श्रद्धालुओं के लिए यह पवित्र नीम-पीपल का जोड़ा केवल दो वृक्षों का मेल नहीं, बल्कि देव और देवी के एक साथ पूजन का सर्वोत्तम माध्यम बन चुका है. यहां आने वाले भक्त नीम को माता शक्ति का स्वरूप और पीपल को भगवान शिव का प्रतीक मानकर दोनों की एक साथ आराधना करते हैं. वृक्ष के चारों ओर बंधे अनगिनत रंग-बिरंगे पवित्र धागे और चढ़ाए गए मनौतियों के चिह्न यहां आने वाले भक्तों की अटूट आस्था और विश्वास की गवाही देते हैं. महिलाओं एवं पुरुषों द्वारा प्रतिदिन निष्ठापूर्वक की जाने वाली परिक्रमा से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहता है.

​पुजारी प्रशांत भारती बताते हैं कि संपूर्ण शिवहर जिले और आसपास के क्षेत्रों में ऐसा अनोखा और प्राकृतिक रूप से अलौकिक वृक्ष अन्य कहीं देखने को नहीं मिलता है. यह अपने आप में एक अत्यंत विशिष्ट और दुर्लभ प्राकृतिक धरोहर है. जहां आकर श्रद्धालुओं को असीम मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति होती है. हर वर्ष विशेष अवसरों, त्यौहारों और सावन के महीने में यहां भक्तों का विशाल सैलाब उमड़ता है. जहां लोग आकर भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं.