सुबह की शुरुआत अच्छी सोच और मन की शांति के साथ हो, तो दिनभर के कामों को लेकर नजरिया भी बेहतर हो सकता है. इसी वजह से कई लोग दिन की शुरुआत पूजा-पाठ, ध्यान या धार्मिक ग्रंथों के पाठ से करते हैं. श्रीमद्भगवद्गीता का पहला श्लोक भी सुबह पढ़ने के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है. इसमें राजा धृतराष्ट्र संजय से कुरुक्षेत्र में जमा हुए कौरवों और पांडवों के बारे में सवाल पूछते हैं.
पहली नजर में यह युद्ध से जुड़ा एक सवाल लगता है, लेकिन इसके पीछे परिवार के प्रति मोह और अपने-पराए का भाव भी दिखाई देता है. आइए जानते हैं गीता के इस श्लोक का पूरा पाठ, सरल अर्थ, इसे पढ़ने की विधि और इससे मिलने वाली सीख.
श्रीमद्भगवद्गीता का पहला श्लोक
धृतराष्ट्र उवाच धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः. मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय ॥ 1 ॥
श्लोक के कठिन शब्दों का मतलब
धृतराष्ट्र उवाच: धृतराष्ट्र ने कहा.
धर्मक्षेत्रे: धर्म की भूमि पर.
कुरुक्षेत्रे: कुरुक्षेत्र नामक स्थान पर.
समवेता: एक जगह इकट्ठा हुए.
युयुत्सवः: युद्ध करने की इच्छा रखने वाले.
मामकाः: मेरे पुत्र या मेरे पक्ष के लोग.
पाण्डवाः: पांडु के पुत्र.
किमकुर्वत: क्या किया.
संजय: धृतराष्ट्र के सारथी और उन्हें युद्ध का हाल बताने वाले संजय.









