कम खाते हैं फिर भी बढ़ रहा है वजन? जानें इसके संभावित कारण

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आमतौर पर लोगों की यह धारणा होती है कि वजन बढ़ने या मोटापा आने की एकमात्र वजह जरूरत से ज्यादा भोजन करना या तैलीय और फास्ट फूड का सेवन है। हालांकि, स्वास्थ्य विज्ञान के नजरिए से यह बात पूरी तरह सच नहीं है। कई बार लोग बेहद नपा-तुला, पौष्टिक खाना खाते हैं और रोजाना वर्कआउट भी करते हैं, इसके बावजूद उनका वजन लगातार बढ़ता जाता है और वे समझ नहीं पाते कि ऐसा क्यों हो रहा है।

चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर का भार बढ़ने के पीछे सिर्फ हमारा खानपान ही जिम्मेदार नहीं होता, बल्कि कई अंदरूनी शारीरिक परेशानियां और हमारी रोजमर्रा की आदतें भी इसके लिए बड़ी वजह बनती हैं। आज की आधुनिक जीवनशैली में घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना और मानसिक तनाव हमारे शरीर की पाचन व ऊर्जा प्रणाली (मेटाबॉलिज्म) को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं। आइए जानते हैं अनजाने में वजन बढ़ाने वाले उन 5 मुख्य कारणों के बारे में:

1. शरीर के हार्मोन्स का असंतुलन

जब शरीर के भीतर हार्मोन्स का तालमेल बिगड़ जाता है, तो कैलोरी बर्न होने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और खाया हुआ भोजन फैट के रूप में जमा होने लगता है। थायराइड की समस्या (हाइपोथायरायडिज्म), महिलाओं में होने वाली पीसीओएस (PCOS) की बीमारी और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी स्वास्थ्य स्थितियां वजन को बेतहाशा बढ़ा देती हैं। यदि कड़ी मेहनत के बाद भी चर्बी कम नहीं हो रही, तो डॉक्टर से मिलकर हार्मोनल टेस्ट कराना बेहद जरूरी है।

2. अधूरी और खराब नींद की आदत

एक स्वस्थ वयस्क के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लेना बेहद आवश्यक है। जब हम पर्याप्त नींद नहीं लेते, तो शरीर में 'घ्रेलिन' नामक हार्मोन (जो भूख का अहसास कराता है) का स्तर तेजी से बढ़ता है और 'लेप्टिन' (जो पेट भरने का संकेत देता है) का ग्राफ नीचे गिर जाता है। नतीजतन, जागने की स्थिति में व्यक्ति को बार-बार तेज भूख लगती है और वह ओवरईटिंग (ज्यादा खाना) करने लगता है, जिससे मोटापा बढ़ता है।

3. मानसिक तनाव और 'कोर्टिसोल' का खेल

आज की भागदौड़ और दबाव भरी जिंदगी में तनाव व चिंता हर दूसरे व्यक्ति की समस्या बन चुकी है। जब दिमाग लंबे समय तक स्ट्रेस में रहता है, तो शरीर 'कोर्टिसोल' नाम का स्ट्रेस हार्मोन रिलीज करता है। यह हार्मोन न केवल भूख को भड़काता है, बल्कि शरीर को पेट के आसपास अतिरिक्त फैट जमा करने का निर्देश भी देता है। तनाव के समय लोग अक्सर मीठा या जंक फूड ज्यादा खाने लगते हैं, जिसे 'इमोशनल ईटिंग' कहा जाता है।

4. शारीरिक निष्क्रियता (सिटिंग जॉब)

यदि आपका काम ऐसा है जिसमें आपको दिनभर सिर्फ कुर्सी पर बैठकर कंप्यूटर के सामने बिताना पड़ता है, तो आपका शरीर बेहद कम ऊर्जा खर्च कर पाता है। बची हुई अतिरिक्त कैलोरी सीधे तौर पर शरीर में चर्बी का रूप ले लेती है। मोबाइल, टीवी और लैपटॉप के बढ़ते इस्तेमाल ने इंसानी शरीर की प्राकृतिक हलचल को बेहद सीमित कर दिया है, जो मोटापे की सबसे बड़ी जड़ है।

5. कुछ विशेष एलोपैथिक दवाइयों के साइड इफेक्ट्स

कई बार हमारे बढ़ते वजन के पीछे वो दवाइयां होती हैं जिनका हम किसी अन्य बीमारी के इलाज के लिए सेवन कर रहे होते हैं। डिप्रेशन की दवाएं (एंटीडिप्रेसेंट), स्टेरॉयड, उच्च रक्तचाप (बीपी), हार्मोनल पिल्स और डायबिटीज की कुछ दवाइयां शरीर में वाटर रिटेंशन (पानी का जमा होना) बढ़ा देती हैं और मेटाबॉलिज्म को सुस्त कर देती हैं। अगर किसी इलाज के दौरान अचानक वजन बढ़ने लगे, तो अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें, लेकिन खुद से दवा बंद न करें।

मोटापे से बचने के आसान और प्रभावी उपाय:

  • 30 मिनट का नियम: रोज कम से कम आधे घंटे की तेज सैर (ब्रिस्क वॉक), योग या मनपसंद एक्सरसाइज जरूर करें।

  • गैजेट्स से दूरी: सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और लैपटॉप को खुद से दूर कर दें ताकि गहरी नींद आ सके।

  • तनाव प्रबंधन: मानसिक शांति के लिए ध्यान (मेडिटेशन) लगाएं या संगीत का सहारा लें।

  • नियमित स्वास्थ्य जांच: साल में कम से कम एक बार अपनी पूरी बॉडी का रूटीन चेकअप जरूर करवाएं।