पीरियड्स में मंदिर जाना, बाल धोना या अचार छूना… क्या सही, क्या गलत?

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माहवारी (पीरियड्स) हर महिला के जीवन से जुड़ी एक अत्यंत सामान्य और प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है। इसके बावजूद, आज के आधुनिक दौर में भी रूढ़िवादिता के कारण समाज में इस विषय पर खुलकर चर्चा करने से परहेज किया जाता है। जागरूकता की कमी और सदियों से चली आ रही रूढ़िवादी सोच के कारण महिलाओं, विशेषकर युवा लड़कियों को स्वास्थ्य संबंधी कई दिक्कतों और मानसिक संकोच से गुजरना पड़ता है।

इन्हीं सामाजिक वर्जनाओं को तोड़ने और महिलाओं को मेंस्ट्रुअल हाइजीन (मासिक धर्म स्वच्छता) के प्रति सचेत करने के उद्देश्य से वैश्विक स्तर पर हर साल 28 मई को 'विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस' का आयोजन किया जाता है। इस मुहिम का एकमात्र लक्ष्य सुरक्षित माहवारी प्रबंधन को बढ़ावा देना है, ताकि हर नारी बिना किसी लोकलाज या भय के अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे सके। महिलाओं की सेहत को दुरुस्त रखने के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे पीरियड्स से जुड़े अंधविश्वासों और वैज्ञानिक तथ्यों के अंतर को समझें।

1: पीरियड्स के खून का रंग सिर्फ चटक लाल ही होना चाहिए

  • वैज्ञानिक सच: यह धारणा पूरी तरह गलत है। मासिक धर्म के दौरान रक्त का रंग हल्का गुलाबी, कत्थई, गहरा भूरा या काला भी हो सकता है। खून का रंग पूरी तरह से शरीर में होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव, फ्लो की गति और पीरियड्स के दिनों पर निर्भर करता है। हालांकि, यदि रक्त का रंग लगातार अजीब बना रहे, थक्के बहुत ज्यादा आएं या तीव्र दुर्गंध आए, तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

 2: इन दिनों में बाल धोने या नहाने से सेहत बिगड़ती है

  • वैज्ञानिक सच: यह समाज में फैला सबसे बड़ा और नुकसानदेह मिथक है। इसके विपरीत, डॉक्टरों का साफ कहना है कि मासिक धर्म के समय शारीरिक साफ-सफाई रखना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। नियमित स्नान करने और सिर धोने से शरीर स्वच्छ रहता है, जिससे बैक्टीरिया जनित संक्रमण (इंफेक्शन) की आशंका खत्म हो जाती है। हल्के गुनगुने पानी से नहाने पर मांसपेशियों को आराम मिलता है, जिससे पेट की ऐंठन और बदन दर्द में काफी राहत मिलती है।

 3: पीएमएस (PMS) जैसी कोई चीज नहीं होती, यह सिर्फ नखरे हैं

  • वैज्ञानिक सच: प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (PMS) कोई काल्पनिक बात नहीं, बल्कि एक प्रमाणित डॉक्टरी स्थिति है। मासिक चक्र शुरू होने से कुछ दिन पहले महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर तेजी से बदलता है। इसी वजह से उन्हें अत्यधिक थकान, सिरदर्द, पेट में भारीपन, चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स (अचानक मूड बदलना) जैसी वास्तविक मानसिक व शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसे नजरअंदाज करने के बजाय सहानुभूति पूर्वक समझना जरूरी है।

 4: अचार, इमली या खट्टी चीजों को छूने से वे सड़ जाती हैं

  • वैज्ञानिक सच: चिकित्सा विज्ञान में इस बात का कोई भी आधार या प्रमाण नहीं है कि किसी महिला के छूने से भोजन या अचार खराब हो सकता है। यह विशुद्ध रूप से प्राचीन काल की पुरानी वर्जनाओं पर टिकी एक भ्रांति है। पीरियड्स के दौरान महिलाएं अपने दैनिक जीवन के सभी कामकाज पूरी तरह सामान्य रूप से कर सकती हैं।

5: एक ही सैनिटरी पैड को पूरा दिन चलाया जा सकता है

  • वैज्ञानिक सच: ऐसा करना महिलाओं के लिए जानलेवा बीमारियों या गंभीर यूटीआई (मूत्र मार्ग संक्रमण) का कारण बन सकता है। लंबे समय तक एक ही पैड का इस्तेमाल करने से उसमें बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं, जिससे त्वचा पर चकत्ते (रैशेज), खुजली और अंदरूनी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। सेहत की सुरक्षा के लिए हर 4 से 6 घंटे के भीतर सैनिटरी पैड या मेंस्ट्रुअल कप को बदलना अनिवार्य है।

 6: पीरियड्स के दौरान बिस्तर से नहीं उठना चाहिए, एक्सरसाइज पूरी तरह बंद हो

  • वैज्ञानिक सच: इस दौरान भारी वजन उठाना या कठिन वर्कआउट करना भले ही ठीक न हो, लेकिन हल्की स्ट्रेचिंग, योग और वॉक (पैदल चलना) करना स्वास्थ्य के लिए वरदान साबित होता है। शारीरिक गतिविधि से शरीर में रक्त का संचार बेहतर होता है, जिससे एंडोर्फिन नामक 'फील-गुड' हार्मोन रिलीज होता है। यह हार्मोन पीरियड्स के दर्द, मानसिक तनाव और चिड़चिड़ेपन को प्राकृतिक रूप से कम करने में मदद करता है।