वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बनी हुई हैं। युवा वर्ग भी तनाव, चिंता और अवसाद जैसी चुनौतियों से जूझता दिखाई दे रहा है। आमतौर पर लोग शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति तो सतर्क रहते हैं, परंतु मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी कर देते हैं। इसी क्रम में स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग के कारण युवाओं में 'रिंग्जाइटी' नामक एक नई मानसिक स्थिति तेजी से उभरकर सामने आ रही है।
क्या है 'रिंग्जाइटी' और इसके लक्षण
'रिंग्जाइटी' शब्द 'रिंग' और 'एंग्जाइटी' के मेल से बना है। मेडिकल साइंस में इसे 'फैंटम रिंगिंग' या 'फैंटम फोन सिग्नल्स' के नाम से भी जाना जाता है। इस स्थिति से प्रभावित व्यक्ति को बार-बार यह झूठा अहसास होता है कि उसका फोन बज रहा है, उसमें वाइब्रेशन हो रहा है या कोई नया नोटिफिकेशन आया है, जबकि वास्तव में ऐसा कुछ नहीं होता। किसी संदेश या कॉल का लगातार इंतजार करने वाले और हर पल फोन देखने के आदी लोग इसका शिकार अधिक बनते हैं।
अनुसंधान और मानसिक स्थिति का प्रभाव
वर्ष 2016 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, जिन व्यक्तियों में अपनों से दूर होने या रिश्तों को खोने का अत्यधिक डर (अटैचमेंट एंग्जाइटी) होता है, उनमें फैंटम रिंगिंग का अहसास अधिक देखा गया है। इसके अलावा जो लोग पहले से ही तनाव या चिंता से ग्रसित हैं, उनमें यह प्रवृत्ति ज्यादा दिखाई देती है। हालांकि कभी-कभार ऐसा अहसास होना सामान्य माना जाता है, लेकिन अगर यह बार-बार होने लगे, तो इस पर ध्यान देना आवश्यक हो जाता है।
विशेषज्ञों की राय और नियंत्रण के उपाय
वरिष्ठ मनोचिकित्सकों के अनुसार, रिंग्जाइटी कोई स्थाई मानसिक बीमारी नहीं है, बल्कि यह स्मार्टफोन के लगातार इस्तेमाल के कारण मस्तिष्क का एक भ्रमित उत्तर है। जब दिमाग फोन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है, तो शरीर की सामान्य हलचल को भी फोन का वाइब्रेशन समझ बैठता है। इस स्थिति से उबरने के लिए फोन के नोटिफिकेशंस को नियंत्रित करना, स्क्रीन टाइम घटाना, बार-बार फोन चेक करने की आदत पर रोक लगाना और अपने तनाव का सही प्रबंधन करना अत्यंत आवश्यक है। यदि यह भ्रम दिनचर्या को प्रभावित करने लगे, तो विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित रहता है।









