42 पूर्व जजों ने SIR का किया समर्थन, चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर दिया जोर

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नई दिल्ली। चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कार्यक्रम को लेकर चल रहे राजनीतिक घमासान और विरोध-प्रदर्शनों के बीच अब न्यायपालिका और नागरिक समाज का समर्थन भी सामने आने लगा है। देश के 272 प्रतिष्ठित नागरिकों और उच्च न्यायालयों के 42 पूर्व न्यायाधीशों ने एक खुला पत्र (ओपन लेटर) जारी कर चुनाव आयोग और एसआईआर प्रक्रिया का खुलकर समर्थन किया है।

पूर्व जजों ने चुनाव आयोग को कमजोर करने के प्रयासों पर जताई चिंता

42 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक प्रमुख समूह द्वारा जारी इस ओपन लेटर में चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थानों को कथित तौर पर कमजोर करने के चल रहे राजनीतिक अभियानों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। पूर्व जजों ने स्पष्ट किया कि कानूनन चुनाव आयोग को देश में चुनाव और मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का पूरा अधिकार प्राप्त है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछला एसआईआर भी दो दशक पहले हुआ था, तब किसी ने इस पर कोई सवाल नहीं उठाया था।

विपक्ष के विरोध को बताया 'माहौल बनाने की सियासत'

पूर्व जजों ने विपक्षी दलों द्वारा किए जा रहे विरोध-प्रदर्शनों को तीखे शब्दों में ‘माहौल बनाने की सियासत’ करार दिया है। उनका कहना है कि यह सारा शोर आम मतदाताओं का नहीं, बल्कि उन राजनीतिक दलों और नेताओं का मचाया हुआ है जो लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव जीतने में नाकाम रहे हैं। पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले पूर्व जजों और सेवानिवृत्त संवैधानिक अधिकारियों ने साफ किया है कि वे किसी भी राजनीतिक दल के पक्ष या समर्थन में नहीं हैं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बचाने के लिए अपनी बात रख रहे हैं।

युवा कांग्रेस की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में आज होगी सुनवाई

एक तरफ जहां एसआईआर के समर्थन में देश के प्रबुद्ध वर्ग की आवाज बुलंद हो रही है, वहीं दूसरी तरफ सियासी मोर्चे पर टकराव जारी है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) और अन्य छात्र संगठनों के प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस द्वारा अनुमति न दिए जाने का मामला अब अदालत तक पहुंच गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय में इस रोक को चुनौती देने वाली युवा कांग्रेस की याचिका पर आज शुक्रवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हो सकती है। यह याचिका युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के माध्यम से संगठन के लीगल सेल के चेयरमैन अधिवक्ता रूपेश सिंह भदौरिया द्वारा दायर की गई है।