नई दिल्ली | ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठाने की दिशा में खगोलविदों को एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक सफलता मिली है। सुदूर अंतरिक्ष में स्थित कुछ खगोलीय पिंडों की दूरी इतनी अधिक है कि वहां से निकलने वाले प्रकाश को धरती तक का सफर तय करने में अरबों साल लग जाते हैं। इसी क्रम में, भारतीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के एक संयुक्त दल ने पिछले 19 वर्षों की अथक निगरानी के बाद एक विशालकाय ब्लैक होल में रोशनी का एक बेहद दुर्लभ और अनोखा चक्र खोज निकाला है। यह क्रांतिकारी खोज ब्लैक होल के व्यवहार और आकाशगंगाओं की कार्यप्रणाली को समझने के नजरिए को पूरी तरह बदल सकती है।
'3सी 454.3' में मिला रोशनी का जादुई पैटर्न
वैज्ञानिकों ने '3सी 454.3' नामक एक अत्यंत चमकदार क्वासर (ब्लेजर) में एक निश्चित अंतराल पर दोहराए जाने वाले प्रकाश पैटर्न की पहचान की है। 'होल अर्थ ब्लेजर टेलीस्कोप' परियोजना के माध्यम से 19 साल तक जुटाए गए आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इस खगोलीय पिंड की चमक हर 433 दिनों में एक तय नियम के तहत घटती और बढ़ती है। वैज्ञानिक शब्दावली में इस दुर्लभ घटना को 'ऑप्टिकल क्वासी-पीरियोडिक ऑस्सिलेशन' (QPO) कहा जा रहा है। इस महत्वपूर्ण अनुसंधान में भारत के 'आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज' (ARIES) के वैज्ञानिकों ने बेहद अहम भूमिका निभाई है।
क्या होता है ब्लेजर और कैसे चमकता है इसका केंद्र?
वास्तव में, 3सी 454.3 एक 'ब्लेजर' है, जो कि सक्रिय आकाशगंगाओं का ही एक विशेष और अत्यंत ऊर्जावान रूप होता है। इन आकाशगंगाओं के केंद्र में एक महाकाय ब्लैक होल स्थित होता है, जो अपने आसपास मौजूद गैस, धूल और अन्य पदार्थों को भीषण गति से अपनी ओर खींचता है। इस प्रक्रिया में अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है, जिससे आकाशगंगा का मध्य भाग (एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लियस या AGN) अप्रत्याशित रूप से चमकने लगता है। जब इस चमकते हुए केंद्र से निकलने वाली शक्तिशाली ऊर्जा की लपटें या जेट सीधे हमारी पृथ्वी की दिशा में होती हैं, तो उसे 'ब्लेजर' कहा जाता है।
खगोल विज्ञान के भविष्य के लिए क्यों खास है यह खोज?
आमतौर पर ब्रह्मांडीय पिंडों की चमक में होने वाले उतार-चढ़ाव अनियंत्रित होते हैं, लेकिन जब यह बदलाव एक निश्चित समय चक्र में खुद को दोहराता है, तो इसे क्यूपीओ (QPO) कहते हैं। अब तक ऐसे संकेत केवल एक्स-रे तरंगों में ही देखे गए थे, लेकिन दृश्य प्रकाश (ऑप्टिकल लाइट) में ऐसा चक्र मिलना बेहद असाधारण है। इस ब्लेजर के केंद्र में मौजूद ब्लैक होल का द्रव्यमान हमारे सूर्य से लगभग 50 करोड़ से 230 करोड़ गुना अधिक है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अरबों साल का सफर तय करके हम तक पहुंचने वाली इस रोशनी के अध्ययन से ब्लैक होल के चुंबकीय क्षेत्रों, उससे निकलने वाली विनाशकारी जेट्स और ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली ऊर्जा स्रोतों के कामकाज को समझने में मदद मिलेगी।









