लातूर| भीषण सूखे ने लातूर में न केवल खेतों की हरियाली छीन ली है, बल्कि लोगों के सामने अपने मवेशियों और पशुओं को बचाए रखने का भी गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। ऐसे कठिन समय में अहमदपुर के स्कूली बच्चों ने इस दर्द को अपनी उम्र से कहीं ज्यादा गहराई से समझा है। डॉ. हरिवंशराय बच्चन विद्यालय के प्राथमिक कक्षाओं के मासूम बच्चों ने अपनी गुल्लक फोड़कर कुल दो लाख रुपये जुटाए और इसे मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर दिए।
मुंबई में मुख्यमंत्री को सौंपा चेक और किसानों की लाचारी
बच्चों की ओर से यह सहायता राशि मुंबई में एक औपचारिक भेंट के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपी गई। इन नन्हे बच्चों की यह प्रेरणादायक कोशिश ऐसे समय में उम्मीद जगाती है, जब एक तरफ किसान अपनी लहलहाती फसल को बचाने के बजाय उसे पशुओं के चारे के लिए काटने को मजबूर हैं। काव्हा गांव के एक किसान नारायण गुडे के पास सात भैंसें, दो गायें और कुछ बछड़े हैं। पर्याप्त बारिश न होने के कारण जब सारा हरा चारा खत्म हो गया, तब उन्हें अपने मवेशियों का पेट भरने के लिए मजबूरन अपनी गन्ने की खड़ी फसल को काटना पड़ रहा है।
लोअर तेरणा परियोजना में पानी का स्तर घटकर 21 प्रतिशत पर पहुंचा
लातूर जिले की लोअर तेरणा परियोजना में जलस्तर लगातार गिरते हुए अब उसकी कुल क्षमता का केवल 21 प्रतिशत ही रह गया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने इस जलाशय के बचे हुए पानी को अब पूरी तरह से केवल पेयजल के लिए ही सुरक्षित कर दिया है। इसके साथ ही, खेती के लिए अवैध रूप से पानी उठाने वालों पर निगरानी और सख्ती दोनों बढ़ा दी गई हैं। लातूर के जिलाधिकारी ने खुद स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की है।
महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखा घोषित, राहत उपायों की शुरुआत
महाराष्ट्र सरकार ने सितंबर माह के अंत में राज्य के कुल 358 में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है, जो कि राज्य का करीब 74 प्रतिशत हिस्सा है। ये सूखाग्रस्त तालुक कुल 32 जिलों में फैले हुए हैं। सरकार द्वारा यह कदम उठाए जाने के बाद अब प्रभावित इलाकों में फसल के नुकसान का आकलन और राहत कार्यों को तेजी से शुरू कर दिया गया है। इन राहत उपायों में मुख्य रूप से फसल ऋणों का पुनर्गठन करना, कृषि ऋणों की वसूली पर रोक लगाना, भू-राजस्व में विशेष रियायत देना और कृषि पंपों के बिजली बिलों में राहत प्रदान करना शामिल है।








