प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुहर्रम के जुलूस से जुड़ी एक जनहित याचिका को यह कहते हुए बंद (दाखिल दफ्तर) कर दिया है कि यह पूरा मामला मुस्लिम समुदाय का आपसी विषय है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस स्थिति में राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है और न ही इसमें कोर्ट के किसी दखल की आवश्यकता है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने इलाहाबाद ऐतिहासिक मोहर्रम कमेटी के अध्यक्ष असरार अहमद नियाजी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
प्रशासन को जुलूस से कोई आपत्ति नहीं: सरकारी पक्ष
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से मुख्य स्थायी अधिवक्ता मनोज सिंह ने कोर्ट के सामने प्रयागराज कमिश्नरेट के सहायक पुलिस आयुक्त द्वारा 23 जून 2026 को जारी लिखित निर्देश पेश किए। इन दस्तावेजों के आधार पर कोर्ट को बताया गया कि सरकार या स्थानीय प्रशासन को मुहर्रम का जुलूस निकालने पर कोई आपत्ति नहीं है। प्रशासन ने साफ किया कि जुलूस न निकालने का फैसला 'वक्फ तजिया कलां, इलाहाबाद' नामक संस्था का अपना निजी निर्णय है, जिसका याचिकाकर्ता कमेटी से कोई लेना-देना नहीं है।
आपसी तालमेल से सुलझाएं आंतरिक विषय: हाई कोर्ट
हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि यह पूरा विवाद याचिकाकर्ता और मुस्लिम समुदाय के अन्य सदस्यों के बीच का एक घरेलू और आंतरिक मामला है। इस तरह के विषयों में राज्य सरकार या प्रशासन का कोई हस्तक्षेप नहीं बनता है।
इस मामले में याचिकाकर्ता का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता सैयद मोहम्मद इकबाल हसन ने रखा, जबकि प्रतिवादी की ओर से पुनीत कुमार गुप्ता कोर्ट में उपस्थित रहे।









