अंतरिक्ष में भारत की एक और उड़ान, 4 सितंबर को EOS-05 सैटेलाइट की लॉन्चिंग

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श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) भारी क्षमता वाले स्वदेशी जीएसएलवी (GSLV) रॉकेट के माध्यम से पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-05 का प्रक्षेपण करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 4 सितंबर को तड़के 2:55 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इस उपग्रह को लॉन्च किया जाएगा। यह भारत का पहला ऐसा उपग्रह होगा जो उप-भू-समकालिक कक्षा (Sub-Geosynchronous Orbit) में स्थापित होकर देश के विशाल भू-भाग की लगातार निगरानी करने में सक्षम होगा।

एक ही स्थान पर 24 घंटे पैनी नजर

EOS-05 को पृथ्वी से लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा। इस विशेष कक्षा में उपग्रह की गति पृथ्वी की घूर्णन गति के समान रहेगी, जिससे यह एक ही स्थान पर स्थिर रहकर भारत के बड़े हिस्से की तस्वीरें निरंतर भेजता रहेगा। सामान्य उपग्रहों की तरह इसे एक ही क्षेत्र के ऊपर से दोबारा गुजरने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, जिससे वास्तविक समय (Real-time) की निगरानी संभव हो सकेगी।

प्राकृतिक आपदाओं में तुरंत मिलेगी मदद

इस उपग्रह से प्राप्त डेटा और तस्वीरें चक्रवात, बाढ़, बादल फटने और जंगलों में लगने वाली आग जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में बेहद उपयोगी साबित होंगी। यह उपग्रह बाढ़ के दायरे और चक्रवात से प्रभावित क्षेत्रों का सटीक अनुमान लगाने में मदद करेगा। यह जानकारी मौसम विभाग, आपदा प्रबंधन टीमों (NDRF) और अन्य प्रशासनिक एजेंसियों को त्वरित राहत कार्य चलाने में सहायता करेगी।

सीमा सुरक्षा और भू-भाग निगरानी में बढ़ावा

यह सैटेलाइट जमीन पर होने वाले भौगोलिक और पर्यावरणीय बदलावों को दर्ज करने के साथ-साथ सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। 36,000 किमी की ऊंचाई से निरंतर निगरानी की क्षमता के कारण पाकिस्तान और चीन की सीमाओं के आसपास होने वाली सैन्य गतिविधियों और घुसपैठ जैसी हलचलों पर कड़ी नजर रखी जा सकेगी।