नई दिल्ली: देश में चांदी के बेरोकटोक (अप्रतिबंधित) आयात का दौर अब खत्म हो गया है। केंद्र सरकार ने एक बड़ा आर्थिक फैसला लेते हुए चांदी के आयात को 'मुक्त' श्रेणी से हटाकर 'प्रतिबंधित' (सख्त नियमों वाली) श्रेणी में डाल दिया है। इस नीतिगत बदलाव के बाद अब किसी भी व्यक्ति या कंपनी को चांदी का आयात करने के लिए सरकार से विशेष मंजूरी या लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। सरकार को यह कड़ा कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि हाल ही में चांदी के आयात में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई थी, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा था।
चांदी के आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी और विदेशी मुद्रा पर दबाव
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में चांदी का आयात सालाना आधार पर लगभग 157% बढ़कर 3,845.51 करोड़ रुपये (411.06 मिलियन डॉलर) पर पहुंच गया, जो अप्रैल 2025 में सिर्फ 1,367.67 करोड़ रुपये था। वित्तीय वर्ष 2026 में चांदी का आयात 149.48% की भारी उछाल के साथ 12.05 अरब डॉलर हो गया था। मार्च 2025 में जहाँ 1.28 लाख किलोग्राम चांदी आयात हुई थी, वहीं मार्च 2026 में यह 91% बढ़कर 2.47 लाख किलोग्राम पर पहुंच गई।
मौजूदा समय में भारत के पास 690 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो 10 महीने के आयात के लिए काफी है। हालांकि, रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी वैश्विक परिस्थितियों और सोने-चांदी के लगातार बढ़ते आयात को देखते हुए सरकार बेहद सतर्क है। सरकार का मकसद इस कीमती विदेशी मुद्रा को बचाकर ऊर्जा (क्रूड ऑयल) और उर्वरक जैसी बेहद जरूरी चीजों के आयात के लिए सुरक्षित रखना है।
शनिवार से नियम लागू, सोना-चांदी खरीदने पर पहले ही लगा था शुल्क
शनिवार से लागू हुए इस नए प्रतिबंध के दायरे में बुलियन-ग्रेड चांदी (99.9% या उससे अधिक शुद्धता वाली चांदी की छड़ें) और अन्य सभी प्रकार की चांदी की छड़ें शामिल हैं। इससे पहले सरकार आयात को नियंत्रित करने के लिए सोने और चांदी पर लगने वाले आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) को भी 6% से बढ़ाकर 15% कर चुकी है। इसके अलावा, सरकार ने हाल ही में देशवासियों से गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने और एक साल तक सोना न खरीदने की अपील भी की थी, ताकि देश की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।








