प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जनगणना 2027 के तहत स्व-गणना पहल में हिस्सा लिया। दरअसल यह कदम भारत में जनगणना के इतिहास में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है, क्योंकि देश की राजधानी दिल्ली समेत आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस बार पूरी जनगणना प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से शुरू की गई है। इस पहल के साथ ही 15 दिनों की स्व-गणना अवधि शुरू हो गई है, जिसमें नागरिक सरकारी वेब पोर्टल के जरिए स्वयं ही अपने परिवार और आवास से जुड़ी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।
दरअसल राष्ट्रपति भवन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गृह सचिव गोविंद मोहन और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण सहित वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में पोर्टल पर अपने परिवार का विवरण स्वयं भरा। उनकी यह भागीदारी देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभ्यास को दिए गए महत्व को दर्शाती है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी लिया हिस्सा
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी स्व-गणना प्रक्रिया पूरी करते हुए देशवासियों से इसमें सक्रिय भागीदारी करने की अपील की। प्रधानमंत्री की यह अपील नागरिकों को इस डिजिटल जनगणना अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने और देश के भविष्य के आंकड़ों को सटीक बनाने में योगदान देने के लिए प्रेरित करती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी ऑनलाइन फॉर्म भरकर इस पहल में हिस्सा लिया, जिससे इस डिजिटल प्रक्रिया को उच्च स्तरीय समर्थन मिला है।
पहली बार भारत की जनगणना पूरी तरह से डिजिटल
यह पहली बार है जब भारत की जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जा रही है। इस डिजिटल बदलाव का उद्देश्य जनगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना, डेटा संग्रह को अधिक कुशल बनाना और मानवीय त्रुटियों की संभावना को कम करना है। नागरिक अब घर बैठे ही अपनी जानकारी सुरक्षित रूप से दर्ज कर सकते हैं, जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है और डेटा की सटीकता में भी सुधार आता है। यह पहल नागरिकों को अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करने का अवसर देती है, जिससे प्रक्रिया में उनकी सीधी भागीदारी सुनिश्चित होती है।
पहले चरण में आवास और मकानों की गणना की जाएगी
जनगणना 2027 को दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहले चरण में आवास और मकानों की गणना की जाएगी, जिसमें देश में उपलब्ध आवासीय इकाइयों और उनकी विशेषताओं से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। यह चरण शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आवास की स्थिति, उसकी गुणवत्ता और पहुंच को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस डेटा का उपयोग आवास योजनाओं, शहरी नियोजन और बुनियादी ढांचा विकास के लिए किया जाएगा।
जानिए दूसरे चरण में क्या किया जाएगा?
दूसरे चरण में जनसंख्या से जुड़ा विस्तृत डेटा एकत्र किया जाएगा। इसमें व्यक्तियों की जनसांख्यिकीय, सामाजिक और आर्थिक जानकारी शामिल होगी, जैसे आयु, लिंग, शिक्षा का स्तर, व्यवसाय, धर्म और जाति (यदि लागू हो)। यह विस्तृत जानकारी सरकार को विभिन्न सामाजिक-आर्थिक समूहों की जरूरतों को समझने, लक्षित नीतियां बनाने और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक आधार प्रदान करेगी।
दिल्ली में स्व-गणना की समय-सीमा अलग-अलग क्षेत्रों के लिए निर्धारित की गई है, ताकि पूरी प्रक्रिया को सुचारु रूप से चलाया जा सके। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) और दिल्ली छावनी क्षेत्रों में स्व-गणना प्रक्रिया तुरंत शुरू हो गई है। वहीं, दिल्ली के नगर निगम (MCD) क्षेत्रों में यह पहल 1 मई से 15 मई तक चलेगी। यह क्षेत्रीय विभाजन यह सुनिश्चित करता है कि विभिन्न प्रशासनिक इकाइयों में जनगणना अभियान को उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार प्रबंधित किया जा सके।
स्व-गणना अवधि समाप्त होने के बाद, घर-घर जाकर जानकारी जुटाने का अभियान दो चरणों में पूरा किया जाएगा। यह कदम उन नागरिकों और परिवारों तक पहुंचने के लिए उठाया जा रहा है जिनकी डिजिटल पहुंच सीमित है या जो किसी कारणवश स्वयं अपनी जानकारी दर्ज नहीं कर पाए हैं। यह दोहरी रणनीति यह सुनिश्चित करती है कि जनगणना में कोई भी व्यक्ति या परिवार छूट न जाए, जिससे देश की आबादी का एक व्यापक और सटीक चित्र प्रस्तुत किया जा सके।









