दारा सिंह की सजा माफी का मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, ओडिशा सरकार को निर्देश

0
4

नई दिल्ली| सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को ओडिशा सरकार को ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टुअर्ट स्टेन्स और उनके दो मासूम बेटों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दारा सिंह उर्फ रविंद्र पाल की दया याचिका पर त्वरित निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह के संवेदनशील मामलों को लंबे समय तक अधर में लटका कर नहीं रखा जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने जताई गहरी नाराजगी

न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर कड़ा असंतोष जताया। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार यदि याचिका खारिज करना चाहती है तो कर दे, लेकिन निर्णय अवश्य ले। पीठ ने चेतावनी देते हुए कहा, "आप दो वर्षों से फैसले से बच रहे हैं। यदि अगली तारीख तक निर्णय से अवगत नहीं कराया गया, तो संबंधित उच्च अधिकारी को अदालत में व्यक्तिगत रूप से तलब किया जाएगा।"

17 सितंबर को होगी अगली सुनवाई, 26 साल से जेल में बंद है दारा सिंह

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर तय करते हुए आदेश दिया है कि राज्य सरकार अपने 19 अगस्त के निर्देशानुसार लिए गए फैसले से अवगत कराए। 63 वर्षीय दारा सिंह पिछले 26 वर्षों से अधिक समय से कारावास में बंद है। उसने वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट में रिहाई याचिका दाखिल कर दलील दी थी कि वह 24 वर्ष से अधिक की सजा काट चुका है और अतीत के कृत्य पर पश्चाताप कर रहा है।

जानिए क्या था 1999 का भीषण तिहरा हत्याकांड?

यह जघन्य वारदात 22-23 जनवरी 1999 की मध्यरात्रि को ओडिशा के क्योंझर ज़िले के मनोहरपुर गांव में हुई थी। दारा सिंह के नेतृत्व में आई भीड़ ने गाड़ी में सो रहे ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी स्टेन्स और उनके दो बेटों को जिंदा जला दिया था। सीबीआई अदालत ने 2003 में दारा सिंह को मौत की सजा सुनाई थी, जिसे 2005 में उच्च न्यायालय ने आजीवन कारावास में बदल दिया। वर्ष 2011 में सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।