नई दिल्ली| भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक चाक-चौबंद और अत्याधुनिक बनाने के लिए केंद्र सरकार एक अभूतपूर्व कदम उठाने जा रही है। देश की जिन सीमाओं पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवान तैनात हैं, वहां अब 'स्मार्ट बॉर्डर' प्रोजेक्ट लागू किया जाएगा। इसके तहत तकनीक और जवानों के तालमेल से एक ऐसा लीक-प्रूफ सुरक्षा ग्रिड तैयार किया जाएगा, जिसे भेद पाना दुश्मनों के लिए नामुमकिन होगा। 'स्मार्ट बॉर्डर' का यह पूरा कॉन्सेप्ट अब अपने अंतिम चरण में है और शुरुआत में देश की विभिन्न सीमाओं के 7 से 8 संवेदनशील स्थानों पर इस पायलट प्रोजेक्ट को लॉन्च किया जाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को त्रिपुरा दौरे के दौरान भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित लंकामूरा सीमा चौकी (BOP) पर बीएसएफ जवानों से संवाद करते हुए यह महत्वपूर्ण घोषणा की।
चार-स्तरीय (चतुष्कोणीय) रणनीति से सुरक्षित होंगी सीमाएं
गृह मंत्री ने साफ किया कि सिर्फ जवानों की तैनाती से सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित नहीं रखा जा सकता, इसके लिए स्थानीय स्तर पर एक मजबूत ग्रिड की जरूरत है। इस नई रणनीति में चार प्रमुख स्तंभ होंगे:
स्थानीय प्रशासन: जिले के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) और पुलिस अधीक्षक (SP) की सक्रिय भागीदारी।
जमीनी नेटवर्क: सीमावर्ती गांवों के पटवारी और सरपंचों को सुरक्षा तंत्र से जोड़ना।
अत्याधुनिक तकनीक: थर्मल इमेजर, सेंसर और आधुनिक सर्विलांस सिस्टम का इस्तेमाल।
जवानों का पराक्रम: बीएसएफ और एसएसबी के जवानों की मुस्तैदी।
अमित शाह ने जोर देकर कहा, "अगर हम यह सोचते हैं कि सीमाओं की सुरक्षा केवल आइसोलेशन (अकेले में) की जा सकती है, तो यह संभव नहीं है। जब तक हम सीमावर्ती क्षेत्रों के स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों को इस व्यवस्था में शामिल नहीं करेंगे, तब तक देश को पूरी तरह सुरक्षित नहीं बनाया जा सकता।"
650 किमी पुरानी बाड़ बदलेगी, 119 किमी नई फेसिंग को मंजूरी
त्रिपुरा फ्रंटियर की संवेदनशीलता को देखते हुए गृह मंत्री ने कहा कि त्रिपुरा तीन ओर से अंतर्राष्ट्रीय सीमा से घिरा हुआ है, इसलिए यह हमारे लिए सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। सीमा पर लगी बाड़ (फेसिंग) के आधुनिकीकरण के तहत 15 साल से ज्यादा पुरानी हो चुकी करीब 650 किलोमीटर की बाड़ में से 119 किलोमीटर नई और अत्याधुनिक बाड़ लगाने की मंजूरी केंद्र सरकार ने दे दी है। इसके अलावा, सीमा चौकियों पर 24 घंटे बिजली आपूर्ति, ग्रीन एनर्जी (सौर ऊर्जा) पहल और जवानों के लिए शुद्ध पेयजल की व्यवस्थाओं को भी पूरा कर लिया गया है।
पर्यावरण की सेवा: सीएपीएफ जवान लगाएंगे 2 करोड़ पौधे
सैनिकों के कल्याण के साथ-साथ गृह मंत्री ने उनके द्वारा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की भी जमकर सराहना की। उन्होंने बताया:
वर्ष 2019 से लेकर अब तक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के जवानों ने देश भर में 7.5 करोड़ से अधिक पौधे रोपे हैं।
इस साल 40 से 60 लाख नए पौधे लगाने और पुराने नष्ट हो चुके पौधों की जगह दोबारा वृक्षारोपण करने का लक्ष्य है।
अगले वर्ष सीएपीएफ के जवान देश भर में 2 करोड़ पौधे लगाकर पर्यावरण को मजबूत करेंगे।
दौरे के दौरान गृह मंत्री ने बीएसएफ की 37वीं वाहिनी में जवानों के लिए नए आवासीय परिसरों का ई-लोकार्पण किया और 97वीं वाहिनी में क्वार्टर गार्ड परिसर का ई-शिलान्यास भी किया।
2047 तक विकसित भारत के लिए 'स्मार्ट सुरक्षा ग्रिड' जरूरी
अपने संबोधन के समापन पर अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। लेकिन भारत को विकसित बनाने की पहली शर्त यह है कि भारत को पूरी तरह सुरक्षित होना होगा। हमें देश को पड़ोसी देशों से होने वाली स्मगलिंग (तस्करी), मानव तस्करी और युवाओं को खोखला कर रही ड्रग्स की सप्लाई से बचाना होगा। इसी मंशा के साथ केंद्र सरकार ने सीमाओं पर एक ऐसा 'स्मार्ट सुरक्षा ग्रिड' बनाने का काम हाथ में लिया है, जो देश के भीतर और बाहर की हर चुनौती का डटकर मुकाबला कर सके। उन्होंने कहा कि बीएसएफ का नाम आते ही हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है, क्योंकि देश आपकी कठिनाइयों और आपके त्याग को भली-भांति महसूस करता है।









