सुप्रीम कोर्ट में पांच नए जज, सीजेआई सूर्यकांत ने दिलाई शपथ

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नई दिल्ली: भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में आज एक बड़ा और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट के पांच नए जजों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इन नई नियुक्तियों के साथ ही अब देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में जजों की कुल संख्या बढ़कर 37 हो गई है। हाल ही में बढ़ाए गए कुल स्वीकृत पदों के बाद अब कोर्ट में केवल एक पद खाली रह गया है, जिससे मुकदमों के निपटारे में और तेजी आने की उम्मीद है।

शपथ लेने वाले नए जजों में देश के अलग-अलग हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और वरिष्ठ वकील शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने बीते 27 मई को इन नामों की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी, जिसे सरकार ने महज चार दिनों के भीतर मंजूरी दे दी।

इन पांच नए जजों ने ली पद की शपथ

सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में आज इन प्रतिष्ठित चेहरों ने कार्यभार संभाला:

  • वरिष्ठ वकील वेंकिता सुब्रमणि मोहना (सीधे वकील से जज बनीं)

  • जस्टिस श्री चंद्रशेखर (बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश)

  • जस्टिस शील नागू (पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश)

  • जस्टिस संजीव सचदेवा (मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश)

  • जस्टिस अरुण पल्ली (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश)

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से बढ़कर हुई 38

पिछले महीने सरकार ने एक अध्यादेश जारी कर सुप्रीम कोर्ट में जजों की अधिकतम स्वीकृत संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 कर दिया था (जिसमें मुख्य न्यायाधीश का पद भी शामिल है)। सीटें बढ़ने और पुराने खाली पदों को मिलाकर कुल 6 पद खाली चल रहे थे। आज हुई 5 नियुक्तियों के बाद अब केवल 1 पद खाली बचा है। हालांकि, इसी महीने यानी जून में दो वरिष्ठ जज रिटायर होने वाले हैं; जस्टिस पंकज मिथल 16 जून को और जस्टिस जे के माहेश्वरी 28 जून को सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

वकील से सीधे जज बनने वाली दूसरी महिला बनीं वीएस मोहना

इन नियुक्तियों में वरिष्ठ वकील वेंकिता सुब्रमणि मोहना का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। वे साल 2018 में जज बनीं जस्टिस इंदु मल्होत्रा के बाद देश की दूसरी ऐसी महिला वकील हैं, जिन्हें सीधे बार (वकालत) से प्रमोट करके सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया है। 59 वर्षीय जस्टिस मोहना ने साल 1988 में कोयंबटूर लॉ कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की थी और 2015 में उन्हें वरिष्ठ वकील का दर्जा मिला था।

महिला प्रतिनिधित्व: जस्टिस मोहना के आने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की संख्या दो हो गई है। उनके साथ जस्टिस बी वी नागरत्ना पहले से सुप्रीम कोर्ट में सेवाएं दे रही हैं। खास बात यह है कि जस्टिस नागरत्ना साल 2027 में एक महीने से अधिक समय के लिए भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश (CJI) बनकर इतिहास रचेंगी।